छत्तीसगढ़

अशोक अग्रवाल के बेटे ने गैरकानूनी ढंग से दी किराए पर दुकान

अंकित मिंज :

बिलासपुर। नगर निगम से दुकान लीज पर लेकर किसी दूसरे को किराए पर नहीं दिया जा सकता है। यह कहना नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त एस सी श्रीवास्तव का है।

ऐसा करने वालों के खिलाफ नगर निगम कोई भी कार्रवाही कर सकता है। एक तरह से यह 420 का मामला बनता है। नगर निगम के अधिकारी चाहें तो एफआईआर भी करा सकते हैं।

नगर निगम ने कंपनी गार्डन में बने दुकान कांग्रेस नेता अशोक अग्रवाल के पुत्र अभिषेक अग्रवाल ने 1998 में 526 रुपए प्रति महीने के हिसाब से किराए पर लिया।

यह दुकान पहले अशोक अग्रवाल लीज पर ले रखे थे। इसके बाद अभिषेक अग्रवाल ने 30 साल के लीज पर लिया है। इसमें पहले होटल चलाया जाता था। इसके बाद काफी हाउस के लिए किराए पर दिया गया। पिछले कुछ दिनों से काफी हाउस को खाली कराकर अब जूता दुकान के लिए दे दिया गया है।

अभिषेक अग्रवाल ने होटल को नगर निगम से अपने नाम पर लिया है। जिसे 50 हजार से अधिक में किराए में दे दिया गया है। नगर निगम तत्कालीन आयुक्त एससी श्रीवास्तव ने बताया प्रदेश के किसी भी नगर निगम में ऐसा प्रावधान नहीं बना है कि नगर निगम की दुकान को किराए पर लेकर दूसरे के किराए पर दे दिया जाए।

अगर ऐसा कोई करता है तो यह 420 का मामला बनता है। नगर निगम आयुक्त ,उपायुक्त या अन्य सक्षम अधिकारी चाहे तो दुकान को किराए पर देने वाले के खिलाफ पुलिस में एफआईआर करा सकता है। श्रीवास्तव ने बताया इस मामले के लिए जितना दोषी किराया देने वाले उतना ही दोषी किराए पर लेने वाले हैं। दोनों के खिलाफ कार्रवाही हो सकती है।

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