राष्ट्रीय

विधानसभा चुनाव 2018: बागी उम्मीदवार बढ़ा रहे हैं कांग्रेस की मुश्किलें

टिकट नहीं मिलने से नाराज कई उम्मीदवार

नई दिल्ली :

विधानसभा चुनाव 2018 में चुनाव में कांग्रेस को जीत का पूरा भरोसा है। इसलिए, टिकट नहीं मिलने से नाराज कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर गए। वहीं, कुछ क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशियों की विरोध कर रहे हैं।

कांग्रेस ने बागियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए दो दर्जन से अधिक नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। पर पार्टी के अंदर कई लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि पार्टी से निकालने के बजाए उन्हें समझाने की कोशिश करनी चाहिए थी। वहीं, कई बागी उम्मीदवारों की स्थिति अधिकृत प्रत्याशी से बेहतर है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि विधानसभा की करीब एक दर्जन सीट पर बागी उम्मीदवार कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कई सीट पर जातीय समीकरण भी उनके पक्ष में हैं। ऐसे में पार्टी को उन्हें निकालने के बजाए चुनाव बाद शामिल करने के विकल्प को खुला रखना चाहिए था। क्योंकि, वह निर्दलीय के तौर पर जीत गए तो भाजपा की तरफ झुक सकते हैं।

प्रदेश में एक-दो बार को छोड़कर सरकार के गठन में निर्दलीय की बहुत भूमिका नहीं रही है। 1993 में भैरो सिंह शेखावत (भाजपा) और 2008 में अशोक गहलोत (कांग्रेस) ने निर्दलीयों के साथ मिलकर सरकार बनाई है। चुनावी आंकड़े बताते हैं कि 2013 में भाजपा को मिले जबरदस्त बहुमत के चलते निर्दलीय विधायकों की संख्या बहुत कम हो गई थी।

राजस्थान चुनाव में इस बार जिस तरह कांग्रेस और भाजपा के बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में कड़ी टक्कर दे रहे हैं, उससे निर्दलियों की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, कांग्रेस का दावा है कि उसे पूर्ण बहुमत मिलेगा। चुनाव प्रचार से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि निर्दलीयों की संख्या पिछले चुनाव के मुकाबले भी बहुत कम होगी। पिछली बार सात निर्दलीय चुनाव जीते थे।

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