हबीबगंज रेलवे स्टेशन को एसोचैम ने दी GEM 5 स्टार रेटिंग

इस तरह के निर्माण से पहले सांविधिक निकायों अर्थात एमओईएफ/एसईआईएए/पीसीबी से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी ली जाती है।

दिल्ली: कोविड महामारी के पहले की बात हो या बाद की, भारतीय रेलवे हमेशा अपने यात्रियों को बेहतर से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तत्पर रहा है। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) ने भारतीय रेलवे की इसी कोशिश को सराहा है। दरअसल, एसोचैम यानी भारतीय वाणिज्य एंव उद्योग मंडल ने हबीबगंज रेलवे स्टेशन की इमारत को हाल ही में पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन, कार्यालय भवन और स्टाफ क्वार्टर को GEM 5 स्टार रेटिंग से सम्मानित किया है।

इसे बनाने में सस्टेनेबल बिल्डिंग डिजाइन को अपनाया गया है, जो पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचाता है। साथ ही यह अपशिष्ट का भी कम उत्पादन करता है।

हरित भवन मापदंडों के अनुसार बनाया गया है यह रेलवे स्टेशन


इस रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया जा रहा है। इस रेलवे स्टेशन की विशेषता यह है कि इसे प्राकृतिक प्रकाश के अधिकतम उपयोग, बेहतर वेंटिलेशन, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री के उपयोग, पुनर्नवीनीकरण पानी के उपयोग, सौर ऊर्जा के दोहन, वर्षा जल संचयन, पर्यावरण के अनुकूल निर्माण के साथ हरित भवन मापदंडों के अनुसार बनाया गया है। इसकी बिजली की मांग का लगभग 70% सौर ऊर्जा के उपयोग से पूरा किया जाएगा। रेलवे स्टेशन की कुल बिजली की मांग 950 किलोवाट है, और रेलवे प्लेटफॉर्म शेल्टर पर लगाए गए फोटोवोल्टिक सेल 660 किलोवाट तक की बिजली उत्पादित कर सकते हैं।

शत प्रतिशत अपशिष्ट जल प्रबंधन की है व्यवस्था


रेलवे स्टेशन के साथ-साथ पुनर्वास संरचनाओं (स्टाफ क्वार्टर, निर्माण कार्यालय, सी एंड डब्ल्यू कार्यालय) के लिए वर्षा जल संचयन की सुविधा की गई है। मीटरिंग, दोहरी फ्लश प्रणाली, वातित जल नल और वाटर ऑडिट के माध्यम से जल प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। स्टेशन पर कुल 500 केएलडी पानी का उपयोग किया जाता है, जिससे 300 केएलडी अपशिष्ट जल उत्पन्न होता है। यहां एसटीपी द्वारा अपशिष्ट जल प्रबंधन किया जाता है। साथ ही शत प्रतिशत अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण कर बागवानी और एप्रन धोने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

निर्माण में भूजल का नहीं किया गया है उपयोग


इस तरह के निर्माण से पहले सांविधिक निकायों अर्थात एमओईएफ/एसईआईएए/पीसीबी से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी ली जाती है। यह गौर करने वाली बात है कि स्टेशन के निर्माण या संचालन के लिए किसी भी भूजल का उपयोग नहीं किया गया है। इनडोर एरिया को बेहतर बनाने के लिए वेस्ट बिल्डिंग और एयर कॉनकोर्स के लिए इंसुलेटेड रूफ पैनल का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रोजेक्ट में विभाजन कार्य में एएसी (ऑटोक्लेव्ड एरेटेड कंक्रीट) ब्लॉकों का भी प्रयोग हुआ है।

एनएफपीए राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा अधिनियम का अनुपालन करने वाला पहला रेलवे स्टेशन


एनएफपीए राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा अधिनियम का अनुपालन करने वाला यह पहला रेलवे स्टेशन है। इस भवन में ऐसे एयर कॉनकोर्स और सबवे हैं, जिनमें अग्नि संवेदन के साथ-साथ अग्निशमन सुविधाएं हैं। सभी सिस्टम की निगरानी स्काडा द्वारा की जाएगी। वेस्ट बिल्डिंग और एयर कॉनकोर्स में स्काई लाइट की सुविधा भी की गई है। सभी भवनों में प्रभावी वेंटीलेशन और प्राकृतिक प्रकाश के लिए मानदंडों के अनुसार वेंटिलेशन की व्यवस्था भी की गई है। इसके साथ कॉन्कोर्स स्तर पर प्रस्तावित मेट्रो के साथ सीधा कनेक्शन, उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध यात्रा अनुभव सुनिश्चित करेगा।

हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर सिंगल यूज प्लास्टिक है बैन


सूखे और गीले ठोस कचरे को अलग-अलग कूड़ेदानों में एकत्र किया जाता है और नगर निगम के मानदंडों के अनुसार निपटाया जाता है। हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर सिंगल यूज प्लास्टिक बैन है। स्टेशन पर बॉटल क्रशर भी उपलब्ध है और रैग पिकिंग भी की जाती है। अत्याधुनिक पार्किंग मानदंडों के अनुसार अलग-अलग वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग की सुविधा है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन के लिए चार्जिंग प्वाइंट, ड्रॉप ऑफ जोन के लिए समर्पित लेन, पार्किंग में पेवर ब्लॉक आदि की भी व्यवस्था है।

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