अंतरिक्ष में ये है एस्‍ट्रोनॉट्स का अनोखा घर, जानें खास बातें

यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र 2024 तक यहां काम करेगा

इंटरनैशनल स्‍पेस स्‍टेशन (आईएसएस) की अंतरिक्ष में स्‍थापना के हाल ही में 20 साल पूरे हुए हैं। इसे 20 नवंबर 1998 को अंतरिक्ष में भेजा गया था। अंतरिक्ष को करीब से समझने के लिए इसे लॉन्‍च किया गया था।

यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र 2024 तक यहां काम करेगा। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के एडमिनिस्ट्रेशन ने प्रस्‍ताव रखा है कि 2025 के बाद इसे चालू नहीं रखा जाएगा।

आइए जानते हैं इससे जुड़ी

15 देशों की मदद से अब तक 19 बार सैटलाइट भेजकर यहां सुविधाएं जुटाई गईं हैं। इसको लॉन्‍च करने में 120 बिलियन डॉलर का खर्च आया था।

4.20 लाख किलो के वजन वाला यह स्‍पेस स्‍टेशन 90 मिनट में 28 हजार किमी की रफ्तार से पृथ्‍वी का चक्‍कर लगाता है। इसे धरती से 400 किमी ऊपर स्‍थापित किया गया है।

इस वक्‍त स्‍टेशन में नासा के एस्‍ट्रोनॉट लेरॉय शियाओ मौजूद हैं। जो स्‍पेस स्‍टेशन में आई गड़‍बड़ियों को दूर करने के लिए स्‍पेस वॉक भी करते हैं। आईएसएस नासा की नई सोच को परिभाषित करता है।

एस्‍ट्रोनॉट लेरॉय शियाओ के मुताबिक स्‍पेश स्‍टेशन में रहना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। एस्‍ट्रोनॉट को रिपेयरिंग के लिए स्‍पेसवॉक करनी पड़ती है। हमें जो इलेक्‍ट्रॉनिक पार्ट्स मिलते हैं, वे अलग-अलग देशों में बने होते हैं। उनका इलेक्ट्रिक सिस्‍टम भी अलग होता है।

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