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वर्तमान में हाईटेक बस स्टैंड का संचालन मेंटनेंस का सालाना खर्च 50 लाख रुपए से अधिक

अंकित मिंज

बिलासपुर। साढ़े 7 करोड़ की लागत से निर्मित तिफरा हाईटेक बस स्टैंड राज्य सरकार और सीएसआईडीसी के बीच पेंडुलम की तरह फंस कर बदहाली के आंसू रो रहा है। आलम ये है कि इसके संचालन में न तो सीएसआईडीसी की रुचि है ना ही जिला प्रशासन मामले के निराकरण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

वादे, आश्वासन एवं आपसी तनातनी का नतीजा है कि प्रदेश का इकलौता हाईटेक बस स्टैंड बदहाली के कगार पर पहुंच गया है।

इसकी पहचान अब जगह-जगह पसरी गंदगी, बजबजाती नालियां, बेजा-कब्जा एवं बेतरतीब बस स्टैंड के तौर पर होने लगी है।

महानगरीय तर्ज पर हाईटेक बस स्टैंड की शुरुआत

महानगरीय तर्ज पर बडे जोर- शोरों से हाईटेक बस स्टैंड की शुरुआत की गई थी। निजी बस मालिकों को बडी़ मान-मनौव्वल के बाद यहां लाया गया था, लेकिन नतीजा टांय-टांय फिस्स हो गया। वर्तमान में हाईटेक बस स्टैंड का संचालन सीएसआईडीसी द्वारा किया जा रहा है, जिस पर मेंटनेंस का सालाना खर्च 50 लाख रुपए से अधिक है।

बस मालिकों ने बढ़ा किराया देने से किया मना

सीएसआईडीसी की मंशा थी कि बस मालिकों, दुकानों, ऑफिसों एवं बसों के स्टापेज किराए से बस स्टैंड का संचालन आराम से होगा। लेकिन मामला तब फंस गया जब निजी बस मालिकों ने बढ़ी हुई दर से किराया देने से इंकार कर दिया। नतीजा ये निकला कि प्रति महीने का 4 लाख रुपए से अधिक का खर्च अब गले की फांस बन गया है।

तमाम कोशिशों के बाद भी सीएसआईडीसी इससे पीछा नहीं छुड़ा पा रही है। संचालन के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है। जिला प्रशासन से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। नतीजा कुछ नहीं निकल रहा है।

दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में लगा रखी है याचिका: बस स्टैंड के किराया भुगतान एवं अन्य मामले को लेकर निजी बस मालिक संघ एवं सीएसआईडीसी ने हाईकोर्ट में याचिका लगा रखी है।

अधिक किराए की मांग करना सर्वथा अनुचित

बस मालिकों की मांग है कि शासन ने जिन शर्तों और आश्वासन के साथ हमें यहां लाया था, उससे अधिक किराए की मांग करना सर्वथा अनुचित है, किराए का भुगतान नहीं करेंगे। इधर सीएसआईडीसी का तर्क है कि किराया नहीं मिलेगा तो बस स्टैंड का संचालन किस मद से होगा।

प्रति माह चार से पांच लाख का खर्च बस स्टैंड के बिजली, साफसफाई, गांर्ड एवं मेंटनेंस के मद में खर्च हो रहा है।

संचालन पर अब तक फैसला नहीं, मामला अधर में वर्षों से लटका: निजी बस मालिकों की मांग है कि सीएसआईडीसी को बस स्टैंड के संचालन में किसी प्रकार की परेशानी है तो जिम्मेदारी हमें दी जाए, हम चलाने को तैयार हैं।

जिला प्रशासन को  दिए निर्देश 

तत्कालीन कमिश्नर सोनमणि बोरा एवं सीएसआईडीसी चेयरमैन छगन लाल मूंदड़ा ने बस स्टैंड के संचालन के संबंध में मध्यस्थता करते हुए आश्वासन दिया था कि इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए थे कि शीघ्र फैसला लेकर मामले का निपटारा करे। इस बात को तीन वर्ष से अधिक होने के बावजूद भी मामला अभी तक अधर में है।

सफेद हाथी का बोझ लेने कोई तैयार नहीं

सीएसआईडीसी ने जिला प्रशासन को बस स्टैंड के संचालन की जिम्मेदारी किसी सक्षम एजेंसी को दिए जाने के लिए 6 वर्षों से गुहार लगायी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। जिला प्रशासन ने नगर निगम एवं तिफरा ग्राम पंचायत से कई बार बस स्टैंड के संचालन की जिम्मेदारी लेने को कहा है। लेकिन सफेद हाथी का बोझ उठाने को कोई तैयार नहीं है।

अहम मसला किराए को लेकर है, जिस दर पर बस मालिकों से ऑफिस एवं बसों के हॉल्टेज चार्ज वसूलने की योजना है। उसे देने को कोई तैयार नहीं है। नतीजा सीएसआईडीसी पर लाखों का किराया बकाया है। जिस वादे पर लाए वही किराया देंगे।

पहले की तरह ही देंगे किराया

निजी बस मालिकों की मांग है कि जिस आश्वासन के साथ पुराने बस स्टैंड से यहां लाया गया था, वही किराया देंगे। हमें कहा गया था कि पुराने बस स्टैंड में दफ्तर का जो किराया लिया जा रहा है, वहीं किराया लागू रहेगा। यहां आने पर ऑफिस का किराया चार गुना बढा दिया गया, बसों के नाइट हॉल्टेज के नाम पर प्रति बस सौ रुपया मांगा जा रहा है, साफ-सफाई, बिजली एवं मेंटनेंस के नाम पर प्रति महीने हजारों का बिल थमाया जा रहा है। किसी हालत में भुगतान नहीं करेंगे।

प्रशासन शीघ्र निर्णय ले

बस स्टैंड के संचालन की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है, तो जिम्मेदारी हमें दी जाए। आखिर कोई निर्णय तो हो, मामले को बेवजह लटकाया जा रहा है। इसका खामियाजा
हम उठा रहे हैं, प्रशासन शीघ्र निर्णय ले।

बस स्टैंड के संचालन की जिम्मेदारी के संदर्भ में जिला प्रशासन को निर्णय लेना है। सीएसआईडीसी को प्रति वर्ष लाखों का नुकसान हो रहा है, निर्णय जल्द हो तो अच्छा है।

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