छत्तीसगढ़

पढने-लिखने के उम्र में ये बच्चे नशे के चपेट में..

रायपुर: खेलने-कूदने, पढने-लिखने के उम्र में ये बच्चे नशे के चपेट में आचूके हैं, बालावस्था में बच्चे बाल मजदूरी कर रहे हैं। पढाई-लिखाई छोड़कर कचरा बीनने को मजबूर है प्रदेश के बच्चे। जबकि बाल श्रम अधिनियम के तहत 14 वर्ष तक के बच्चे को किसी प्रकार के कार्य कराते पकड़े जाने पर कार्रवाई निश्चित है।

बता दे कि सुभाष नगर, पुलिस लाइन, विद्यानगर, कुंद्रा पारा, कालीबाड़ी, काशीराम नगर, राजेद्रनगर, तेलीबांधा के देवार बस्ती जैसे दर्जनों इलाको के बच्चे भीख मांगने को मजबूर है,

पीडि़त बच्चो का कहना है कि माँ-बाप उनसे काम करवाते है और बदले में उन्हें प्रति माह जेबखर्च के लिए 200 रूपये देते है। ये बच्चे सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच कचरा बीनने का काम कर रहे है। छोटी बच्चियां जिनकी उम्र 12 से 13 वर्ष है वे बच्चियाँ सुनसान इलाको में अक्सर कचरा बीनने जाया करती है जिससे उनके साथ बड़ा अपराध होने की आशंका भी बनी रहती है।

दरअसल राजधानी के देवार जाति के बच्चों में कचरा बीनने के साथ-साथ नशाखोरी करना भी शुरू कर दिया है। आदि हो चुके बच्चों को पान ठेले, मेडिकल में आसानी से नशे की सामग्री उपलब्ध हो जाती है। गुटखा, सुलोशन, कोरेक्स, स्पास्मो जैसे नशीलो दवाइयों जिसका दुरूपयोग बच्चे जाने- अनजाने कर रहे है।

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