एक अनोखा मंदिर, जहां चढ़ता है पत्थरों का चढ़ावा

यहां पर आए श्रद्धालु नवीन ने बताया, 'ज्यादातर श्रद्धालु किसान होते हैं और वे अपने सुखद जीवनयापन या फिर अच्छी फसल के लिए ही प्रार्थना करते हैं

एक अनोखा मंदिर, जहां चढ़ता है पत्थरों का चढ़ावा

मंदिरों में श्रद्धालु सामान्य तौर पर अपनी इच्छा पूरी होने पर रुपये, पैसे या अन्य मूल्यवान चीजें चढ़ाते हैं। लेकिन कर्नाटक के मांड्या में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां पर श्रद्धालु पत्थर चढ़ाते हैं।
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मांड्या के किरागांदुरू-बेविनाहल्ली रोड पर स्थित कोटिकालिना काडू बसप्पा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के अनुसार उन्हें केवल अलग-अलग साइजों के पत्थरों का चढ़ावा चढ़ाने की ही इजाजत है। प्रार्थना के लिए तीन या पांच पत्थरों का चढ़ावा होता है। इसके फलस्वरुप मंदिर के बाहर विभिन्न आकारों के पत्थर जमा हो गए हैं।

बेंगलुरु-मैसूर नैशनल हाइवे पर मांड्या शहर से दो किलोमीटर की दूरी पर बसे इस मंदिर की एक अन्य अनोखी विशेषता यह है कि यहां पर कोई भी पुजारी या फिर स्थाई ढांचा नहीं है। यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को खुद से ही पूजा-अर्चना करनी पड़ती है।

पत्थरों के आकार पर कोई पाबंदी नहीं
स्थानीय लोगों के अनुसार मांड्या तालुक के कई सारे गांवों के निवासी इस मंदिर में पत्थरों का चढ़ावा चढ़ाते हैं। यहां पर भगवान काडू बसप्पा (भगवान शिव) की मूर्ति पत्थरों की बनी हुई है। परम्परा के अनुसार इच्छा पूरी होने पर श्रद्धालु अपने खेत या जमीन से लाए गए पत्थरों को चढ़ाते हैं। तीन या पांच की संख्या में चढ़ाए जाने वाले पत्थरों के आकार को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है।

यहां पर आए श्रद्धालु नवीन ने बताया, ‘ज्यादातर श्रद्धालु किसान होते हैं और वे अपने सुखद जीवनयापन या फिर अच्छी फसल के लिए ही प्रार्थना करते हैं। फसलों की कटाई के बाद वे मंदिर में जाकर तीन या पांच पत्थरों का चढ़ावा चढ़ाते हैं।’

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