अयोध्या विवाद : मुस्लिम पक्ष के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, सारे सवाल हमसें ही, हिंदू पक्ष से क्यों नहीं

नई दिल्ली. अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अदालत सारे सवाल हमसे ही क्यों कर रही है, हिंदू पक्षकारों से क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट में 38वें दिन संवैधानिक बेंच के सामने सुनवाई हुई। वहीं यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारुखी को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए यूपी सरकार को निर्देश दिया गया है। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार ने कहा कि उन्हें दो दिन वक्त चाहिए ताकि दलील पूरी कर सकें। वहीं, राजीव धवन ने कहा कि उन्हें कुछ और वक्त चाहिए। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि पहले से 17 अक्टूबर सुनवाई पूरी करने के लिए समयसीमा तय की गई है और संकेत दिया कि वह एक दिन पहले भी पूरी हो सकती है।
सुनवाई का 38वां दिन, किसकी क्या दलील

मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन: (आगे की ओर वकीलों के लिए तय सीट पर सुब्रमण्यन स्वामी के बैठने के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए) जो भी विजिटर हैं या फिर नॉन एक्रेडिटेड जर्नलिस्ट हैं, उन्हें दर्शक दीर्घा के आगे बार के लिए तय जगह पर नहीं आना चाहिए। योर लॉर्डशिप को किसी भी विशेष व्यक्ति को प्राथमिकता नहीं देना चाहिए। नियम के मुताबिक केवल विजिटर गैलरी में ही उन्हें बैठने की इजाजत है।

चीफ जस्टिस: हम इस मामले को देखेंगे।

राजीव धवन: (दलील शुरू करते हुए) कस्टम माइंड गेम नहीं है। इसे आस्था और विश्वास के साथ नहीं मिलाया जा सकता। दूसरे पक्षकार ने जो भी दलील पेश की है उसमें तथ्यों की कोई बुनियाद नहीं है। हिंदुओं ने कभी भी 1989 से पहले टाइटल यानी मालिकाना हक का क्लेम नहीं किया था। ये तथ्य है।

अयोध्या: हिंदू पक्ष के बाद मुस्लिम पक्षकारों की दलीलें, पढ़ें किस दिन किसने क्या कहा

राजीव धवन: हम इस बात को स्वीकार करते हैं कि आर्कियोलॉजी साइंस है और ये सिर्फ ऑपिनियन नहीं है। (गौरतलब है कि मुस्लिम पक्षकार की ओर से पेश वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था कि ये फिजिक्स और केमेिस्ट्री की तरह साइंस नहीं बल्कि ऑपिनियन है।)

राजीव धवन: हमारा विवादित स्थल पर मालिकाना हक रहा है। ब्रिटिश सरकार हमें अनुदान देती थी और 1854 से ये अनुदान मिलता रहा था। ये अनुदान मस्जिद के बेहतरी के लिए दिया जा रहा था। हिन्दू पक्षकारों की ओर से 1885 से लेकर 1989 के बीच कोई दावा नहीं था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि मंदिर को तोड़ा गया था। हमारा पजेशन शुरू से रहा है। हिंदुओं का दावा काफी बाद का है कि उनका मालिकाना हक है। उन्होंने (हिंदू पक्षकार) 1934 से एडवर्स पजेशन (जबरन कब्जा) का दावा किया है जिसका कोई साक्ष्य नहीं है। जबकि हमारा पजेशन शुरू से रहा है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचू़ड़: बाहरी बरामदे पर हिंदुओं के पूजा और पजेशन के बारे में क्या कहेंगे?

राजीव धवन: मुख्य द्वार और पूर्वी द्वार मुस्लिमों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। हिंदुओं को बाहरी आंगन में पूजा के लिए अनुमति दी गई थी लेकिन उनको मालिकाना अधिकार नहीं दिया गया था।

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