अयोध्या विवाद: आज राजनीतिक रूप से उच्चतम न्यायालय करेगी सुनवाई

नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी शीघ्र सुनवाई की करेंगे मांग

नई दिल्ली: लम्बे समय से चल रहे आयोध्या जमीन विवाद (राम मंदिर, बाबरी मस्जिद) पर सुप्रीम कोर्ट में आज से से 5 जजों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई की रूपरेखा तय करेगी।

इसके अलावा पूजा अर्चना के मौलिक अधिकार का दावा करने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी मंगलवार को कोर्ट में रह कर अपनी याचिका पर शीघ्र सुनवाई की मांग करेंगे। अयोध्या भूमि अधिग्रहण कानून 1993 को चुनौती देने वाली याचिका भी सुनवाई के लिए कोर्ट के सामने लगी है।

केन्द्र सरकार की अर्जी फिलहाल सुनवाई सूची मे शामिल नहीं

हालांकि विवादित भूमि को छोड़ कर अधिगृहित जमीन का अतिरिक्त भाग भूस्वामियों को वापस लौटाने की अनुमति मांगने वाली केन्द्र सरकार की अर्जी फिलहाल सुनवाई सूची मे शामिल नहीं है। इसका कारण शायद यह है कि वह अर्जी अयोध्या राम जन्मभूमि पर मालिकाना हक के मुख्य मुकदमें में दाखिल नहीं की गई थी बल्कि पहले से निस्तारित हो चुके असलम भूरे मामले मे दाखिल की गई है, जो कि एक अलग केस है।

इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर की पीठ सुनवाई करेगी। इससे पहले कोर्ट अयोध्या राम जन्मभूमि मालिकाना हक मुकदमें से संबंधित अपीलों पर 29 जनवरी को सुनवाई करने वाला था लेकिन जस्टिस एसए बोबडे के उपलब्ध न होने के कारण सुनवाई टल गयी थी। इसके बाद 20 फरवरी को सुनवाई की नयी तिथि 26 फरवरी तय हुई थी।

सोमवार को सुब्रमण्यम स्वामी ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष अपनी रिट याचिका का जिक्र करते हुए गुहार लगाई कि उनकी याचिका पर भी मुख्य मामले के साथ ही मंगलवार को सुनवाई की जाए।

मुख्य न्यायाधीश ने स्वामी से कहा कि वह मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहें। स्वामी ने याचिका में कहा है कि जमीन पर अधिकार से बड़ा मौलिक अधिकार पूजा अर्चना का है। उन्हें अबाधित पूजा अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए।

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