अयोध्या एक नाम अनेक – कोसल, विनीता, पदमपुरी इक्कागभूमि, साकेत, विशाखा

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है। कभी अयोध्या के साथ विवाद जुड़े थे, आज अयोध्या विवाद रहित है। अयोध्या को हम सब जितना जानते हैं, अयोध्या उससे कहीं अधिक व्यापक है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि करोड़ों भारतवासियों की आस्था, श्रद्धा और विश्वास की भूमि है, आस्था का प्रतीक है।

भगवान श्रीराम की जन्मभूमि संपूर्ण भारतवर्ष के गौरव, इतिहास, संस्कॄति, परम्परा, विरासत और धार्मिक मूल्यों की धरोधर है। आज हम इस आलेख में अयोध्या को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे-

आगे बढ़ने से पूर्व सबसे पहले हम अयोध्या का अर्थ समझेंगे। अयोध्या मतलब जिसे शत्रु ना जीत सके। युद्ध से हम सभी वाकिफ है। मनुष्य उसी से युद्ध करता है, जिससे वह जीतना चाहता है। या जिससे जीतने की संभावना रहती है। अयोध्या का शाब्दिक अर्थ समझने का प्रयास करते हैं।

अयोध्या में प्रथम अक्षर अ: का अर्थ जिसे जीता न जा सके। अ: योध्या का अर्थ हुआ जिसे जीता न जा सके। सार में अयोध्या का अर्थ हुआ, अयोध्या जिसे जीता न जा सके। अयोध्या का अर्थ अन्य पुराणों में समझने का प्रयास करते हैं।

स्कंदपुराण से अयोध्या का शब्द समझते हैं, इसमें ’अ” कार ब्रह्मा, “य” कार विष्णु है तथा “ध” कार रुद्र का स्वरुप है। इस प्रकार अयोध्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश सभी को मिलाकर अयोध्या बनती है।

अयोध्या को अवध, अयुधा, अ यु ज, उज्झा, अयोज्झा नाम से जाना गया है। पालि आदि ग्रंथों में अयोध्या को नाम अयोज्झा सामने आता है। जैन शास्त्रों में अयुज्झा शब्द अयोध्या के लिए प्रयोग किया गया है। इसके अलावा अन्य कई नाम जैन शास्त्रों में अयोध्या के लिए कोसल, विनीता, रामपुरी और पदमपुरी आदि कई शब्द प्रयुक्त हुए है।

अयोज्झा मेम इक्ष्याकु वंश के राजा अजित की राजधानी रही और इसे भारत की नगरी भी बताया गया है। जैन ग्रंथों में अयोध्या के पर्यायवाची के रुप में कोशल और साकेत शब्द प्रयोग किए गए है। संस्कृत ग्रंथों में अयोध्या शब्द ही मिलता है।

महाभारत और रामायण में विशेष रुप से अयोध्या शब्द का प्रयोग किया गया है। इसे सरयू तट के निकट कहा गया है कालिदास जी ने अयोध्या और साकेत दोनों शब्दों को एक ही अर्थ में प्रयोग किया है। चीनी ग्रंथों में इसे अवध कहा गया है।

अयोध्या और साकेत दोनों को एक दूसरे के पर्यायवाची के रुप में प्रयोग किया गया है। अनेक स्थानों पर अयोध्या का नाम साकेत है। साकेत की ओर जाने वाले अनेक मार्गों का उल्लेख पतंजलि का उल्लेख मिलता है।

वायु तथा ब्रह्माण्ड पुराण में भी अयोध्या को साकेत का नाम ही दिया गया है। महाकाव्य रघुवंश में साकेट को अयोध्या के समान ही कहा गया है। साकेत को अयोध्या और कोसल दोनों को एक ही माना गया है। वराहमिहिर ने भी साकेत का उल्लेख किया है। साकेत नगर का उल्लेख राजा दशरथ और पुत्र की राजधानी के रुप में किया गया है।

कुछ शास्त्रों में अयोध्या को विशाखा नाम से भी सम्बोधित किया गया है। एक बौद्ध कथा के अनुसार विशाख नाम की एक धनी की पुत्री थी। बौद्ध साहित्य में इनका बहुत बड़ा नाम है। विशाख नाम की इस पुत्री ने बौद्ध धर्म में दीक्षा ली और उनका नाम सिक्कों में भी मिलता है। साकेत व अयोध्या दोनों में इसका वर्णन मिलता है।

इसके अलावा जैन ग्रंथों में अयोध्या शब्द के लिए इक्खागभूमि, कोसल, विनीता, रामपुरी और पदमपुरी आदि शब्द प्रयोग किए गए है। विभिन्न जैन ग्रंथों में इक्खागभूमि या इक्ष्वाकुभूमि को अयोध्या का ही एक नाम कहा गया है। अयोध्यापुरी और कल्पतरु दोनों में इक्कागभूमि शब्द को अयोध्या के पर्याय के रुप में प्रयोग किया गया है।

कोसल स्थान महाजनपद कहा गया है। जबकि जैन ग्रंथों में इसे एक नगरी के रुप बताया गया है। अभिधान चिन्तामणि में कोसल स्थान को साकेत का नाम दिया गया है। साकेत ही अयोध्या है और अधोद्या ही कोसल है। कोसल को अनेक स्थानों पर साकेत की राजधानी बताया गया है। प्राकृत ग्नंथोंमें कोसल को कोसलपुरी, कोसला और कोसलानगरी कहा गया।

विनीता और विणीया शब्द भी अयोध्या के लिए प्रयुक्त हुआ है। जम्बूदीप में अयोध्या के लिए विणीया शब्द का प्रयोग अयोध्या के लिए प्रयोग हुआ है। बरहवास अर्थात भारतवर्ष की राजधानी बताया गया है। विनीता के स्थान पर विणीया नाम प्रयोग हुआ है। रामपुरी, पदमपुरी, अयोध्या के साथ साथ इसका एक अन्य नाम नन्दिनी भी बताया गया है।

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