जिले में कोलाहल नियंत्रण अधिनियम लागू

मुंगेली। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने बताया कि जिले में लोकसभा आम निर्वाचन 2019 की अधिसूचना जारी होने के फलस्वरूप आदर्श आचरण संहिता प्रभावशील हो गई है तथा निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। सभी राजनैतिक दल उनके कार्यकर्ता तथा उनसे सहानुभूति रखने वाले व्यक्ति अपने दल के प्रचार-प्रसार के लिये लाउडस्पीकरों का प्रयोग करते है। इन लाउडस्पीकरों का प्रयोग न केवल स्थायी मंच से होता है बल्कि वाहनों यथा ट्रक, टैम्पों, कारें, टैक्सियों, वेन, तिपहिया स्कूटर, साइकिल, रिक्शा आदि पर होते है।

ये वाहन सभी सड़कों, गलियों, उप गलियों पर चलते है और गांवों, बस्तियों, मोहल्लों, कालोनियों में भी बहुत ऊंची आवाज पर लाउडस्पीकरों से प्रसारण किए जाते है। इससे ध्वनि प्रदूषण होता है और आम जनता की शांति व प्रशांति में बाधा उत्पन्न होती है। लाउडस्पीकरों की ऊंची आवाज के प्रयोग से विद्यार्थी वर्ग विशेष रूप से अशांत हो जाते है क्योंकि उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है और लाउडस्पीकर का सुबह से देर रात्रि तक शोरगुल करते है। उक्त ध्वनि प्रदूषण से बूढ़े, दुर्बल और बीमार व्यक्ति मानसिक रूप से प्रभावित होते है।

निर्वाचन अवधि में लाउडस्पीकरों के प्रयोग को पूर्ण रूप से रोका नहीं जा सकता क्योंकि लाउडस्पीकर निर्वाचन प्रचार के एवं जन समूह सम्प्रेषण के साधनों में से एक साधन है। लेकिन इसके साथ-साथ विषम समय एवं विषम स्थान पर लाउडस्पीकर के अविवेक पूर्ण तथा ऊंचे स्वरों पर अव्यवहारिक प्रयोग जिसकी शांति एवं प्रशांति पर कुप्रभाव पड़ता हो एवं सामान्यतः जन सामान्य एवं विशेषतः रोगियों एवं विद्यार्थी समुदाय की बेचैनी का कारण हो, की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अतएव उपरोक्त वर्णित तथ्यों के प्रकाश में हर पहलुओं पर विचार करने के उपरांत जिला दण्डाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा-4 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों का चलाया जाना अथवा चलवाया जाना पूर्ण रूप से निषिद्ध किया है।

ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग चुनाव प्रसार करने के लिए वाहनों पर और चुनावी सभाओं में प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ही किया जा सकता है, किन्तु ऐसे ध्वनि विस्तारक यंत्र साधारण किस्म के होंगे और मध्यम आवाज में ही चलाये जायेंगे। लोक शांति को देखते हुए लम्बे चोंगे वाले माईक Ľहार्न माईक) का उपयोग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया गया है। वाहनों पर और चुनावी सभाओं में एक से अधिक माईक समूह में नहीं लगाये जायेंगे।

इन्हें भी प्रतिबंधित किया गया है। चुनावी सभाओं में एवं चुनाव प्रचार करने के लिए वाहनों पर ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाने के लिए अनुमति अनुविभाग क्षेत्र हेतु अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी से लिखित पूर्वानुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी की अनुमति लेकर सामान्यतः किया जा सकता है, किन्तु शैक्षणिक संस्थाओं, चिकित्सालयों व नर्सिंग होम, न्यायालय परिसर, शासकीय कार्यालय, छात्रावास, नगर पालिका परिषद, जनपद पंचायत एवं किसी भी स्थानीय निकाय कार्यालयों, बैंको, पोस्ट आफिस, दूरभाष केंद्र आदि कार्यालयों से 200 मीटर की दूरी के भीतर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग सामान्य स्थिति में भी पूर्णतः प्रतिबंधित होगा। यह आदेश लोकसभा आम निर्वाचन 2019 की निर्वाचन प्रक्रिया समाप्त होने तक सम्पूर्ण मुंगेली राजस्व जिले में प्रभावशील रहेगा।

जिले में संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम लागू

लोकसभा आम निर्वाचन 2019 के दौरान विभिन्न राजनैतिक दलों एवं उनके अभ्यर्थियों द्वारा चुनाव प्रचार करने के लिये शासकीय/अशासकीय भवनों पर नारे लिखे जाते हैं, बैनर लगाये जाते है, पोस्टर चिपकाये जाते है तथा विद्युत एवं टेलीफोन के खम्भों पर चुनाव प्रचार से संबंधित झण्डियां लगायी जाती है जिसके कारण शासकीय सम्पत्ति का स्वरूप विकृत हो जाता है। इस संबंध में शासन द्वारा छत्तीसगढ़ सम्पत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1994 पारित किया गया है।

इस अधिनियम की धारा-3 में यह स्पष्ट उल्लेख है कि कोई भी जो सम्पत्ति के स्वामी की लिखित अनुज्ञा के बिना सार्वजनिक दृष्टि में आने वाली किसी सम्पत्ति को स्याही, खड़िया, रंग या किसी अन्य पदार्थ से लिखकर या चिन्हित करके उसे विरूपित करेगा वह जुर्माने से जो एक हजार रूपये तक का हो सकेगा दण्डनीय होगा। इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई भी अपराध संज्ञेय होगा।

जिला दण्डाधिकारी ने छत्तीसगढ़ सम्पत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1994 की धारा-5 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये यह आदेश दिया है कि चुनाव प्रचार के दौरान यदि विभिन्न राजनैतिक दलों अथवा चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों द्वारा किसी शासकीय एवं अशासकीय भवन की दीवालों पर किसी भी प्रकार की नारे लिखकर विकृत किया जाता है, विद्युत एवं टेलीफोन के खम्भों पर झण्डियां लगायी जाती है अथवा ऐसे पोस्टर एवं बैनर लगाकर शासकीय सम्पत्तियों को विकृत किया जाता है तो ऐसे पोस्टर एवं बैनर हटाने के लिए चुनावी नारे मिटाने के लिए अनुभाग स्तर पर लोक सम्पत्ति सुरक्षा दस्ता तत्काल प्रभाव से लगाया जायें। इस दस्ते में लोक निर्माण विभाग/स्थानीय निकाय के स्थायी गैंग के पर्याप्त संख्या में कर्मचारी पदस्थ रहेंगे।

यह लोक सुरक्षा सम्पत्ति दस्ता अनुविभागीय अधिकारी/कार्यपालिक दण्डाधिकारी के सीधे देख-रेख में कार्य करेगा। इस दस्ते को सहयोग देने के लिये और स्थल पर जाकर कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिये एक सहायक उप निरीक्षक Ľपुलिस), मुख्यालय पटवारी एवं स्थानीय निकाय के एक कर्मचारी की ड्यूटी लगायी जायें।

लोक निर्माण विभाग द्वारा इस दस्ते को लोक सम्पत्ति को विरूपण से बचाने के लिए सभी आवश्यक सामग्री जैसे गेरू, चूना, कूची, बांस एवं सीढ़ी आदि उपलब्ध करायी जायें। यदि किसी राजनैतिक दल या चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी द्वारा किसी निजी सम्पत्ति को बिना उसके स्वामी के लिखित सहमति के विरूपित किया जाता है तो निजी सम्पत्ति के स्वामी द्वारा संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद लोक सम्पत्ति सुरक्षा दस्ता निजी सम्पत्ति को विरूपित होने से बचाने की कार्यवाही करेगा एवं थाना प्रभारी संबंधित प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर विधिवत जांच कर सक्षम न्यायालय में चालान प्रस्तुत करेंगे। अनुविभागीय अधिकारी/कार्यपालिक दण्डाधिकारी लोक सम्पत्ति विरूपण से संबंधित प्राप्त शिकायतों को एक पंजी में पंजीबद्ध करेंगे तथा शिकायत की जांच कर तथ्य सही पाये जाने पर लोक सम्पत्ति सुरक्षा दस्ता को आवश्यक कार्यवाही करने हेतु निर्देशित करेंगे।

अनुविभागीय अधिकारी/कार्यपालिक दण्डाधिकारी इस संबंध में की गई कार्यवाही विवरण का दैनिक प्रतिवेदन जिला निर्वाचन कार्यालय में भेजना सुनिश्चित करें।

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