हवा में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस फेफड़ों में पहुंच बनते लंग इन्फेक्शन कारण

जाने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के उपाय

आज वायु प्रदूषण की समस्या बिमारियों का कारण बनते जा रही हैं। आज इसी से जुड़ी समस्या लंग इन्फेक्शन को लेकर चर्चा करेंगे जो हवा में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस या फंगस सांस द्वारा इंसान के फेफड़ों में पहुंच कर विकसित होना शुरू कर देें तो फेफड़ों में इंफैक्शन पैदा हो जाता हैं। इस अवस्था को लंग इन्फेक्शन कहा जाता हैं। फेफड़ों में हवा की छोटी-छोटी थैलियां यानि एयर सैक (Air sacs) में इंफैक्शन की वजह से द्रव भर जाता हैं और सांस लेने पर फेंफड़ों में टॉक्सिन्स एकत्रित हो जाते हैं। इससे टीवी के अलावा कई तरह की गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं।

1. किन लोगों को होता है ज्यादा खतरा
जो लोग पहले फेफड़ों की इंफैक्शन का शिकार हो चुके हैं उन्हें दोबार भी इस तरह की परेशानी हो सकती हैं। इसके अलावा प्रदूषण भी इसकी बड़ी वजह हैं।

फैक्टीरियों के नजदीक रहने वाले लोग
फैक्ट्री से निकलने वाला प्रदूषित धुंआ सांस के जरिए जब फेफड़ों तक पहुंचता हैं तो इंफैक्शन पैदा करता हैं। जिन लोगों को अस्थमा की परेशानी रहती हैं, उन्हें वायु प्रदूषण से खुद को बचा कर रखना चाहिए।

स्मोकिंग
धूम्रपान करने वाले लोग बहुत जल्दी फेफड़ों की इंफैक्शन का शिकार हो जाते हैं। किसी दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान करने से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आने से भी लंग इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता हैं।

– गंदे पानी का सेवन
पेय पदार्थों में गंदगी भी इंफैक्शन का कारण बनती हैं। पानी के बैक्टीरिया फेफड़ों तक पहुंच कर सांस लेने की दिक्कत पैदा करते हैं।

– कमजोर प्रतिरोधक क्षमता
शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी संक्रमण की वजह हैं। बैलेंस डाइट न लेने के कारण प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती हैं। इस तरह शरीर जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाता हैं।

– आस-पास की गंदगी
घर या आसपास की गंदगी भी इंफैक्शन का कारण हैं। इससे बचने के लिए साफ-सफाई का खास ख्याल रखें।

2. लंग इंफेक्शन के लक्षण

– खांसी
दो हफ्ते से ज्यादा खांसी रहना और बलगम निकल रही हो तो इसे नजरअंदाज न करें। यह टीबी का लक्षण हो सकता हैं। कई बार बलगम का रंग भी गाढ़ा हो जाता है और इससे बदबू आने लगती हैं तो सतर्क हो जाए।

– सांस फूलना
हल्का-फुल्का काम करने पर या थोड़ा सा चलने पर भी सांस फूलना, थकावट महसूस करना और लगातार कमजोरी का बना रहना लंग इंफेक्शन का कारण हो सकता हैं।

– मांसपेशियों में दर्द
इस रोगी को मांसपेशियों में दर्द भी महसूस होती हैं। कई बार दर्द पीठ तक पहुंच जाती हैं, जिससे बैठने या खड़े होने में भी बहुत ज्यादा तकलीफ होती हैं।

– सांसे तेज होना
अस्थमा के रोगी भी इंफैक्शन का जल्दी शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा बिना का किए बैठे-बैठे सांस तेज होना और सांस लेने में परेशानी पैदा होना इसके लक्षण हैं।

– तेज बुखार
अगर कई दिन तेज बुखार बना रहे तो इसे नजरअंदाज न करके डॉक्टरी जांच जरूर करवाएं।

– सिरदर्द
फेफड़ों की इंफैक्शन में सिर दर्द भी होने लगता हैं। बाकी लक्षणों के साथ सिर में भी दर्द महसूस हो तो सेहत पर ध्यान दें। टीबी के टेस्ट करवाएं।

– गले में दर्द
इस तरह की इंफैक्शन में गले में दर्द भी हो सकता हैं। खांसी और बलगम के साथ इस तरह की स्थिति दिखाई दे तो सतर्क हो जाएं।

– छाती में दर्द होना
बार-बार खांसी करने पर छाती में तेज दर्द होनी फेफड़ों में इंफैक्शन का संकेत हैं।

3. फेफड़ों को स्वस्थ रखने के उपाय
फेफड़ों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सबसे पहले खुद की साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी हैं। बिना हाथ धोए कुछ भी न खाएं, गंदे हाथों से बैक्टीरिया मुंह में चले जाते हैं जो इंफैक्शन बढ़ाने का काम करते हैं।

– योग और एक्सरसाइज
रोजाना सुबह के समय अलोम-विलोम जरूर करें। इसके अलावा डीप ब्रीद योगा करने से फेफड़ों तक स्वच्छ हवा पहुंतची हैं। जिससे श्वसन प्रणाली मजबूत होने लगती है और इंफैक्शन से बचाव रहता हैं।

– पानी पीएं
गर्मी हो सर्दी शरीर में पानी की कमी न होने दें लेकिन स्वच्छ पानी का सेवन करें क्योंकि पानी से फेफड़े हाइड्रेट होते हैं और गंदगी बाहर निकल जाती हैं।

– पौष्टिक खाना खाएं
काले चने, सूप, अंडे, चिकन, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, ब्रोकली, सूखे मेवे आदि अपने आहार में शामिल करें। खुद को भूखा न रखें।

– अखरोट
रोजाना अखरोट खाएं, इसका सेवन फेफड़ों के लिए उपयोगी होता हैं।

– ब्रोकली
विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर ब्रोकली खाने से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं इसलिए इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।

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