कागजों पर प्रतिबंध, धड़ल्ल्ले से हो रहा मत्स्याखेट

बालोद।

जिले में वर्षाकाल में मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए मत्स्याखेट पर पाबंदी तो लगा दिया गया पर इसके बावजूद जिले सहित ग्रामीण अंचल के गांवों के तालाबों में मछली पकड़ने का सिलसिला बैखोप जारी है।

बता दें कि मत्स्य विभाग ने जिला में 15 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाया है पर यह आदेश सिर्फ कागजों पर ही दिख रहा है। जिले के प्रमुख डैम और तालाबों व नदियों में मछली पकड़ने का काम पहले की तरह जारी है । लेकिन यह आदेश महज खाना पूर्ति ही साबित हुआ है। बीते 15 जून से मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगने के बाद एक भी मामले में चेतावनी या जाल जब्त करने जैसी सख्त कार्रवाई विभाग की ओर से नहीं की गई है।

दरअसल छोटी मछलियों की प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के लिए मत्स्य विभाग मानसून आगमन के शुरूआती 2 माह तक मछली मारने पर पाबंदी लगवाता आ रहा है। इस अवधि में मछलियां प्रजनन के लिए अंडे देती हैं और इससे उनकी वंश वृध्दि होती है। इसी को रोकने विभाग द्वारा मत्स्यखेट पर प्रतिबंध लगाते हैं।

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