छत्तीसगढ़

मानव तस्करी की शिकार बांग्लादेशी युवती की सुनवाई से पहले ही हो गई वापसी

बिलासपुर:

छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी की शिकार बांग्लादेशी युवती की घर वापसी और मुआवजा दिलाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका को चीफ जस्टिस के डिवीजन बेंच ने निराकृत कर दिया. बता दें कि शासन ने बीते गुरुवार को याचिका पर सुनवाई होने से पहले ही बीते 23 अगस्त को युवती को बांग्लादेश भेज दिया है. इसी वजह से कोर्ट ने मामले को निराकृत कर दिया है.

दरअसल, बिलासपुर जीआरपी ने साल 2017 को ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस से एक युवती के साथ ही मुर्शिदाबाद निवासी आरोपी संटू शेख को पकड़ा था. इस दौरान जीआरपी ने युवती का बयान दर्ज कर दो लोगों के खिलाफ मानव तस्करी और दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था. साथ ही युवती को बिलासपुर राजकिशोर नगर स्थित उज्ज्वला होम भेज दिया गया था.

इस दौरान उज्ज्वला होम में सामाजिक कार्यकर्ता ने युवती का काउंसलिंग किया और उससे लगातार बातचीत करती रही. पीड़िता के बयान से पता चला कि उसे नौकरी का लालच देकर भारत लाया गया था, फिर उसे जगह-जगह घुमाकर बेच दिया गया. युवती के मुताबिक उसके साथ दुष्कर्म का भी प्रयास किया गया था.

पीड़िता का बयान सुनकर उज्ज्वला होम संचालक और समाज सेविका ने कोर्ट में याचिका दायर कर उसकी घर वापसी के लिए अनुमति देने की मांग की थी. शासन ने उसे घर भेजने का प्रयास किया और बांग्लादेशी उच्चायुक्त ने 3 माह के अंदर सभी प्रक्रिया पूरी कर युवती को बांग्लादेश पहुंचाने की अनुमति दी.

इसी बीच हाईकोर्ट में बीते गुरुवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई से पहले ही युवती को बीते 21 अगस्त को ही अनुमति मिल गई थी और 23 अगस्त को युवती को बांग्लादेश सुरक्षित भेज दिया गया. इस वजह से कोर्ट ने मामले को निराकृत कर दिया है.

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