अपनी मांगों को लेकर डटे रहे बैंक कर्मी, सरकार के खिलाफ लगाए नारे

अंकित मिंज

बिलासपुर।

अपनी मांगों को लेकर बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी डटे रहे। पुराना हाईकोर्ट स्थित भारतीय स्टेट बैंक के मेन ब्रांच में सभी बैंकों के कर्मी केन्द्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे। सोमवार को बैंक खुलने पर सभी बैकों में काफी भीड़ जमा हो गई थी।

वेतन वृद्धि एवं अन्य मांगों को लेकर देश के 21 राष्ट्रीयकृत बैंकों एवं 6 ओल्ड एज प्राइवेट एवं ग्रामीण बैंकों द्वारा 21 दिसंबर को हड़ताल की गई थी। 22 दिसंबर को चौथा शनिवार और रविवार को अवकाश के कारण बैंक लगातार तीन दिनों तक बंद रहे।

लगातार बैंक बंद रहने से करीब 200 करोड़ के चेक भुगतान के लिए अटक गए हैं। आने वाले दो दिनों तक बैंकों के एक बार फिर से बंद होने पर 300 करोड़ से अधिक का भुगतान प्रभावित होने का आशंका जताई जा रही है। बैंक अधिकारियों के साथ कर्मचारी भी शामिल हो गए। पूरे देश से करीब 10 लाख कर्मचारी और अधिकारी इस हड़ताल में शामिल हो गए है।

तीन बैंकों के मर्जर का कर रहे विरोध

यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने देना बैंक, विजया बैंक औैर बैंक आफ बड़ौदा के मर्जर का विरोध करते हुए कहा है कि अगर सरकार ने तमाम बैठकों के बाद विलय के संबंध में सकारात्मक फैसला नहीं लिया है। मजबूरन 26 दिसंबर को देश के 10 लाख बैंक अधिकारी ओर कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे।

सोमवार को मंगला की केनरा बैंक शाखा में यूएफबीयू के अधिकारियों ने जंगी प्रदर्शन कर विरोध जताया। सोमवार को विरोध प्रदर्शन करने वालों में एसबी सिंह, डीके हाटी, राजदेश रावत, जितेंद्र शुक्ला, कैलाश अग्रवाल, शरद बघेल, सौरभ त्रिपाठी. अमृता सिंह अनेक बैंक कर्मी शामिल थे।

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