छत्तीसगढ़

बंछोर दूसरी बार बने ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष

भिलाई । बीएसपी में ऑफिसर्स एसोसिएशन चुनाव में 76 फीसदी मतदान हुआ। 2863 में से 2163 अफसरों ने मतदान नहीं किया। बीएसपी में ऑफिसर्स एसोसिएशन चुनाव में नरेंद्र कुमार बंछोर लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बने। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी पूर्व महासचिव केके यादव को 1110 वोटों से पराजित किया। इसके अलावा महासचिव पद के लिए शाहिद अहमद ने वी रमेश बाबू को 728 और कोषाध्यक्ष के लिए अंकुर मिश्रा ने संदीप गुरवा को 862 मतों से पराजित किया। इस प्रकार बंछोर पैनल ने एकतरफा जीत दर्ज की है।
शुक्रवार को सुबह 9.30 बजे से मतदान शुरू हुआ। भिलाई क्लब में बीएसपी के 2701 में से 2017, राजहरा माइंस के 122 में से 109, नंदिनी माइंस के 23 और हिर्री माइंस के 18 में से 14 अफसरों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। सुबह डेढ़ घंटे में केवल 142 अफसरों ने मतदान किए। दोपहर दो से 4 बजे के बीच कई बार ऐसी भी स्थिति बनी कि पोलिंग अफसर मतदाताओं का इंतजार करते नजर आए। दोनों पैनल के प्रत्याशी भी पोलिंग बूथ तक चक्कर लगाए दिनभर मतदान की गति कितनी धीमी थी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शाम पांच बजे तक 2701 मतदाताओं में से 1127 ने ही मतदान किया था। इसके बाद अचानक मतदान के प्रतिशत में तेजी आई। बीते दिनों हुई आम सभा में डां. कौशलेन्द्र ठाकुर ने इस वर्ष चुनाव प्रचार को लेकर कहा था कि सभी प्रत्याशी शालीनता से चुनाव लड़े। जिसका असर पूरे चुनाव में दिखा।

सीईओ-ईडी नहीं डाल पाए वोट : इस बार ओए चुनाव कई मायनों में पिछले चुनावों से अलग रहा। मतदान में कई वरिष्ठ अधिकारी मतदान नहीं कर पाए। ये सभी अफसर ओए के औपचारिक सदस्य नहीं बने हैं। सीईओ एम. रवि पिछले साल भद्रावती से भिलाई आने के बाद सदस्यता नहीं ले पाए। वहीं डायरेक्टर इंचार्ज मेडिकल डॉ. केएन ठाकुर और ईडी एमएम रीता बनर्जी भी ओए के सदस्य नहीं हैं। इसके अलावा कुछ जनरल मैनेजर भी सदस्यता नहीं ले पाए हैं। ऐसे में इन सभी ने मताधिकार का उपयोग नहीं किया। मतदान के दौरान डायरेक्टर मेडिकल डॉ. संजीव इस्सर जब वोट देने पहुंचे तो उनके साथ डायरेक्टर इंचार्ज डॉ. केएन ठाकुर भी थे। डॉ. ठाकुर सिर्फ चुनाव की स्थिति देखने पहुंचे थे। इस बार पिछले चुनावों की तरह गहमा-गहमी नजर नहीं आई। इस बार प्रत्याशी भी कम थे और ज्यादातर अफसर चुनाव को लेकर उदासीन रहे। वर्कर्स एरिया के कुछ अधिकारियों का कहना है कि वे अपने काम में इतने ज्यादा व्यस्त हैं कि प्लांट से बाहर निकलने के लिए समय ही नहीं है। खास कर मिल्स जोन में अफसर इन दिनों ज्यादा व्यस्त हैं। ऐसे में अधिकारी वोट डालने पहुंचे ही नहीं।

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