छत्तीसगढ़

पाटजात्रा के साथ बस्तर दशहरे का आगाज़

मोगरी मछली व बकरे की बलि पहला विधान
75 दिवसीय बस्तर दशहरा महापर्व

–अनुराग शुक्ला

जगदलपुर। दंतेश्वरी मंदिर के समक्ष रविवार को मोगरी मछली एवं बकरे की बलि से पाटजात्रा की पूजा की गई। इसी के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की शुरूवात हुई।
बस्तर दशहरा समिति ऐतिहासिक विश्व प्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व का हरियाली अमावस्या के अवसर पर 23 जुलाई को माई दंतेश्वरी मंदिर के सामने बेड़ाउमरगांव व झारउमर गांव के दलपति और कमल द्वारा टुर्लू खोटला पाटजात्रा पूजा विधान किया गया।

इसमें 11 मोगरी मछली एवं एक बकरे की बलि दी गई। इसके साथ ही दशहरा में चलने वाले रथ का निर्माण शुरू कर दिया गया है। साथ ही पूजा के दौरान अण्डाए फलए फूल के साथ ही मिठाई आदि भी टूर्लू खोटला में चढ़ाया गया। बताया गया कि बताया कि 4 सितम्बर को डेरा गड़ाई की रस्मए 20 सितम्बर को काछनगादीए 21 सितम्बर को कलश स्थापनाए 22 से 27 सितम्बर तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजाए 28 सितम्बर को निशा जात्राए 29 सितम्बर को कुंवारी पूजाए जोगी उठाई के साथ ही मावली परघावए 30 सितम्बर को भीतर रैनी पूजा विधान के साथ ही रथ परिक्रमाए एक अक्टूबर को बाहर रैनी पूजाए रथ जात्रा पूजाए 2 अक्टूबर को काछन जात्रा पूजा के साथ ही मुरिया दरबारए 3 अक्टूबर को कुटूम्ब जात्रा व 7 अक्टूबर को मां दन्तेश्वरी मां की डोली को विदाई देने के साथ ही दशहरा पर्व का समापन किया जाएगा।

पूजा के दौरान बस्तर दशहरा समिति के नायब तहसीलदार मलय विश्वासए आरआर अर्जन श्रीवास्तवए भाजपा नेता नरसिंह रावए दिप्ती पांडेए सहित संभाग के सभी मांझी, चालकी, मेम्बर, मेम्बरिन, सदस्यए टेम्पल कमेटीए नाईकए पाईक एवं दशहरा समिति के सदस्य सभी मंदिरों के पुजारी तथा श्रद्धालुओं उपस्थित रहे।

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