बस्तर: बम बनाने और एंबुश में माहिर है, नक्सलियों का नया लीडर बसवराजू

1980 में आंध्रप्रदेश में सीपीआइएमएल का वह मुख्य संगठनकर्ता रहा।

बस्तर में सुरक्षाबलों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी ने कहा कि यह नक्सलियों के संगठन का आंतरिक परिवर्तन है।

संगठन की कमान बदलने के बाद नक्सली अपनी रणनीति भी बदल सकते हैं। उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नक्सली हमला कर सकते हैं।

इसकी जानकारी काफी समय से थी भले ही उन्होंने घोषणा अब की है। अवस्थी ने कहा कि हमने सुरक्षाबलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। बसव राजू एनआईए की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल है।

इंटेलीजेंस सूत्रों का कहना है कि बसवराजू और गणपति समेत मुख्य नक्सली नेता बस्तर के अबूझमाड़ के जंगलों में छिपे हो सकते हैं। नक्सली चीफ रहा गणपति बीमार है।

बताया जा रहा है कि उसे लीवर में कुछ समस्या है। 71 साल का गणपति अभी रिटायर नहीं हुआ है। वह सेंट्रल कमेटी का सदस्य बना रहेगा। फोर्स बसव राजू के साथ ही गणपित को भी ढूंढ निकालने की कोशिश में लगातार जुटी है।

कौन है बसवराजू

वर्ष 2011 की एक इंटेलीजेंस रिपोर्ट के मुताबिक नंबला केशव राजू उर्फ बसव राजू करीब 64 साल का है। वह एके 47 रायफल साथ रखता है। छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के इलाके में वह सक्रिय है। बसव राजू पर करीब डेढ़ करोड़ का इनाम घोषित है।

पिछले तीस साल से वह पकड़ में नहीं आया। सुरक्षाबलों के पास उसकी कोई ताजा तस्वीर भी नहीं है। बसव राजू आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के जियनापेट्टा गांव का रहने वाला है। 1970 में उसने घर छोड़ दिया था। उसके नाम से गांव में कुछ जमीन भी है पर वह दोबारा कभी नहीं लौटा।

उसने रिजनल इंजीनियरिंग कालेज वारंगल से बीटेक किया है। उसे नंबल्ला केशव राव गनगन्ना, प्रकाश, कृष्णा, विजय, दरपू नरसिम्हा रेड्डी, नरसिम्हा आदि नामों से भी जाना जाता है।

1980 में आंध्रप्रदेश में सीपीआइएमएल का वह मुख्य संगठनकर्ता रहा। कई साल तक वह नक्सलियों की सेंट्रल रिजनल कमेटी में रहा। 2004 में जब पीपुल्स गुरिल्ला आर्मी और माओइस्ट कम्यूनिस्ट सेंटर का विलय हुआ तो गणपति उसे महासचिव बना।

तभी बसवराजू सेंट्रल कमेटी में शामिल हुआ। उसे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की कमान सौंपी गई। उसकी हैसियत संगठन में नंबर दो की रही।

बम बनाने और एंबुश में माहिर

नक्सलियों का नया कमांडर बसव राजू इससे पहले नक्सली मिलिट्री कमीशन का सचिव रहा। उसे बम बनाने और एंबुश लगाने में महारथ हासिल है।

उसके कमान संभालने के बाद सुरक्षाबलों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पिछले करीब दो साल से लगातार बैकफुट पर रहे नक्सली अपने दो सौ से ज्यादा साथियों को खो चुके हैं। वे पलटवार कर सकते हैं। हालांकि सुरक्षाबल उनके किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम हैं।

बस्तर के जंगल में लगा था लिट्टे का ट्रेनिंग कैंप

एक रिपोर्ट के मुताबिक 1987 में बस्तर के जंगलों में श्रीलंका के लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने नक्सलियों को युद्ध का प्रशिक्षण दिया था।

गणपति, कोटेश्वर राव उर्फ किशन जो 2011 में मारा गया, वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू, मल्ला राजा रेड्डी और बसवराजू ने यहीं लिट्टे से बम बनाने, एंबुश लगाने आदि की ट्रेनिंग ली थी। बसवराजू को बम बनाने का एक्सपर्ट माना जाता है। पुलिस करीब तीस साल से उसकी तलाश में है, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ रहा है।<>

 

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