घर ले जाने के पैसे नहीं थे इसलिए मेडिकल कॉलेज को दान में दे दिया बेटे का शव

छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक आदिवासी मां ने अपने जवान बेटे का शव इसलिए मेडिकल कॉलेज को दान में दे दिया क्योंकि उनके पास शव को घर तक ले जाने और उसका अंतिम संस्कार करने के लिए भी पैसे नहीं थे.

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक आदिवासी मां ने अपने जवान बेटे का शव इसलिए मेडिकल कॉलेज को दान में दे दिया क्योंकि उनके पास शव को घर तक ले जाने और उसका अंतिम संस्कार करने के लिए भी पैसे नहीं थे.

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बडेआरापुर की रहने वाली सुकरी बाई के 20 वर्षीय बेटे वामन को एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी, जिसके बाद उसे गंभीर अवस्था में मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में भर्ती कराया गया था. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

जवान बेटे के मौत के बाद उसके शव को गांव तक ले जाने और अंतिम संस्कार के लिए माँ के पास फूटी कौड़ी नहीं थी. माँ ने अपने जिगर के टुकड़े का शव मेडिकल कॉलेज में दान करने का फैसला कर शवदान में शरीर दे दिया.

मृतक की मां सुधरी बाई का कहना था कि गरीबी के कारण उनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि वे शव को अपने गांव भी ले जा सकें. इसके बाद फिर अंतिम संस्कार करना तो संभव ही नहीं था. वे लोग बहुत गरीब हैं और शव ले जाकर भी कुछ नहीं कर पायेंगे.

उन्होंने बताया कि इसी बीच उन्हें अस्पताल में एक व्यक्ति ने बताया कि अगर वे चाहें तो शव को यहीं मेडिकल कॉलेज में दान दे सकते हैं. तब उन्होंने शव को कॉलेज को दान में दे दिया.

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