छत्तीसगढ़

सितंबर तक रहेगी बस्तर में परिवहन इमरजेंसी

गृह विभाग ने धारा 144 को लागू रखने भरी हामी
मामला बीपीएस के कलेक्टर द्वारा भंग किए जाने का

–अनुराग शुक्ला

जगदलपुर. बस्तर में मुक्त व्यापार की मंशा के साथ प्रशासन और पुलिस ने जिस तरह की पहल की इसके बाद जो हालात बिगड़े उसे देखते कलेक्टर अमित कटारिया ने एसपी आरिफ शेख के प्रतिवेदन के आधार पर 16 मई को बस्तर के सभी परिवहन संघों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 144 के तहत कार्रवाई की थी।

इस आदेश के बाद यह बात सामने आई कि बस्तर में किसी तरह के संघ संगठन के एकाधिकार में परिवहन का व्यवसाय नहीं होगा। कलेक्टर का यह आदेश दो माह के लिए था। आदेश के बाद यह माना जा रहा था कि स्थिति सामान्य होती है तो 61वें दिन से परिवहन पर लगे कर्फ्यू को हटा दिया जाएगा। लगातार इस मामले को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आई और प्रशासन के सहयोगात्म रवैय्ये को स्वीकारा नहीं गया तो राजधानी से भी परिवहन के लिए गाडिय़ां शहर पहुंची।

प्रशासन के मुक्त परिवहन की इस व्यवस्था ने समय के साथ कारगर रूप लिया। इस बीच दो माह का समय गुजर गया। कलेक्टर अमीत कटारिया का तबादला भी हुआ लेकिन प्रशासन मामले की गंभीरता को भांपती रही। 14 जुलाई को ही कलेक्टोरेट से राज्य सरकार को इस मामले को लेकर भेजे गए प्रतिवेदन में कलेक्टर धनंजय देवांगन ने वस्तुस्थिति से अवगत करवाया। सूत्रों के अनुसार गृह विभाग ने बस्तर में बने हालात और यहां पर हुए गोलीकाण्ड की घटना को देखते फिलहाल बस्तर के परिवहन संघों पर इमरजेंसी लागू रख0ने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि

गृह विभाग अब धारा 144 को दो माह और प्रभावशील रखना चाह रही है। उक्ताशय का आदेश राजधानी से जारी हो चुका है हालांकि अब तक इस बात को लेकर प्रमाणिक तौर पर किसी तरह का खुलासा नहीं किया जा रहा है।

जिला बदर की कार्रवाई पर होगी सुनवाई

मालूम हो कि 11 मई को शहर के पास नगरनार इलाके के खूटपदर में हुए गोलीकाण्ड के बाद दोनों पक्षों के खिलाफ अपराधिक मामले कायम हुए। इस बीच पुलिस मामले में संलिप्त नौ आरोपियों की तलाश कर रही है। इस बीच यह जानकारी सामने आई की दो आरोपियों के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की अनुशंसा कलेक्टर ने की है। ऐसी स्थिति में आरोपी पक्ष को अपना पहलू रखने का अवसर दिया जाता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते जब आरोपियों के पक्ष में डीएम के समक्ष अधिवक्ता उपस्थित हुए तो बतौर डीएम कलेक्टर धनंजय देवांगन ने आरोपियों की अनुपस्थिति में कार्रवाई को सुनने से इंकार किया। इस मामले को लेकर जब आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की तो हाईकोर्ट के बाद अब यह निर्णय सामने आया है कि जिला बदर की कार्रवाई में आरोपियों की मौजूदगी के बिना भी उनके अधिवक्ता उपस्थित हो कर उनका पक्ष डीएम के समक्ष रख सकते हैं। फिलहाल कोई सुनवाई नहीं हुई है।

बीपीएस की परेशानी बढ़ी

बस्तर में परिवहन के लिए बीपीएस एक बड़ा माध्यम रहा है। अब प्रशासन की कार्रवाई और सरकार के द्वारा परिवहन संघों पर लगाए गए दो माह के प्रतिबंध के बाद अन्य संघों के साथ इनकी परेशानी भी बढ़ गई है। इस संघ से करीब बीस हजार लोगो को पेट पलता रहा है। मालूम हो कि इससे पहले की गई कार्रवाई के बाद कलेक्टर अमित कटारिया ने प्रशसान की ओर से हाईकोर्ट में केव्हीएट दायर किया था। ऐसा किए जाने के बाद निलंबित बीपीएस के पदाधिकारियों के लिए हाईकोर्ट की डगर भी कठिन हो गई। अब हाईकोर्ट किसी भी तरह का फैसला देने से पहले प्रशासन के पक्ष को संज्ञान में लेगी।

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