b’day spl: फ्रैंक ठाकुरदास के साथ हुई मुलाकात ने बदला अमिताभ बच्चन का जीवन

केएम कॉलेज में साल 1959 से 1962 तक प्राप्त की थी शिक्षा

नई दिल्ली: भारतीय फिल्म अभिनेता, फिल्म निर्माता, टेलीविजन होस्ट, सामयिक पार्श्व गायक और पूर्व राजनीतिज्ञ अमिताभ बच्चन आज अपना 77 वां जन्मदिन माना रहा है.

उन्होंने पहली बार 1970 के दशक में जंजीर, देवर और शोले जैसी फिल्मों के लिए लोकप्रियता हासिल की और बॉलीवुड में उनकी ऑन-स्क्रीन भूमिकाओं के लिए भारत के “नाराज युवा” करार दिया गया.

फ्रैंक ठाकुर दास ने कहा कॉलेज की ड्रामा सोसायटी में होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने

इस मौके पर उनके पहले एक्टिंग गुरु फ्रैंक ठाकुर दास को याद न किया जाए, ऐसा हो नहीं सकता. दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के ड्रामा शिक्षक फ्रैंक ठाकुर दास ने अगर शर्मीले और मितभाषी अमिताभ बच्चन को कॉलेज की ड्रामा सोसायटी में होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने को नहीं कहा होता, तो शायद फिल्म प्रेमी उन्हें कभी बड़े पर्दे पर नहीं देख पाते.

केएम कॉलेज के बीएससी के छात्र अमिताभ बच्चन का जीवन फ्रैंक ठाकुरदास के साथ हुई मुलाकात ने पूरी तरह बदल दिया. अमिताभ बच्चन ने केएम कॉलेज में साल 1959 से 1962 तक शिक्षा प्राप्त की थी.

हर वक्त काम में लगे रहने वाले पंजाबी ईसाई फ्रैंक ठाकुर दास केएम कॉलेज में कई अहम भूमिकाएं निभाते थे. एक कुशल अंग्रेजी शिक्षक होने के साथ ही उनका कॉलेज ड्रामा सोसायटी में भी अहम स्थान था.

साल 2017 में दिए गए एक साक्षात्कार में अमिताभ बच्चन ने उन्हें याद करते हुए बताया था, “मुझे आज भी याद है कि प्रोफेसर फ्रैंक ठाकुर दास ने मुझसे कॉलेज के ड्रामा सोसायटी द्वारा आयोजित नाटकों में बिना देर किए भाग लेने के लिए कहा था.”

पहली मुलाकात में ही बन गए थे उस्ताद

बिग बी ने आगे बताया था, “पहली मुलाकात में ही वे मेरे उस्ताद बन गए थे. उनकी वजह से ही मैंने थियेटर की दुनिया की एबीसी, जैसे स्टेज पर कैसे बोलना होता है और अभिनय के दौरान किरदारों के हाव-भाव को कैसे प्रदर्शित किया जाता है, सीखा था. वह शानदार अभिनेता और निर्देशक थे.”

अमिताभ बच्चन ने फिर जब अंग्रेजी और हिंदी नाटकों में पूरे उत्साह, समर्पण और एक ध्येय के साथ भाग लेना शुरू किया तो उसके बाद फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वे लगे. केएम कॉलेज ड्रामा सोसायटी सिर्फ कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय में ही नहीं, बल्कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में अपने नाटकों का मंचन करती थी और अमिताभ इसके अभिन्न अंग थे.

अमिताभ बच्चन उनके पहले ऐसे छात्र थे, जिन्होंने अभिनेता के तौर पर महान प्रगति की. इसके बाद फ्रैंक ठाकुरदास ने शक्ति कपूर, सतीश कौशिक और कुलभूषण खरबंदा जैसे बॉलीवुड के कई सितारों के करियर को आकार दिया. वे सभी उनके एहसानमंद है, क्योंकि उन्होंने सभी को सीखने के पर्याप्त मौके दिए.

‘मिस्टर इंडिया’ में ‘कैलेंडर’ के किरदार और ‘दीवाना मस्ताना’ में पप्पू पेजर के रूप में लोकप्रियता हासिल करने वाले प्रसिद्ध निर्देशक सतीश कौशिक ने उनके बारे में कहा, “70 के दशक में मैंने जब केएम कॉलेज में दाखिला लिया, तब वे वहां थे और प्रभावशाली ढंग से उनकी उपस्थिति महसूस होती थी.

फ्रैंक सर ने अमिताभ बच्चन को प्रशिक्षण दिया था

मुझे इस बात की जानकारी थी कि फ्रैंक सर ने अमिताभ बच्चन को प्रशिक्षण दिया था. हालांकि वे उन लोगों में से नहीं थे, जो किसी और की प्रसिद्धि का श्रेय खुद लेते थे. उनसे हम जब भी अमिताभ बच्चन के बारे में बाते करते थे, तो वे बस इतना कहते थे, ‘उनमें सीखने की काफी लगन थी और वह हमेशा प्रयोग करने के लिए लालायित रहते थे. उन्हें एक न एक दिन ऊंचाईयों को छूना ही था.’ हालांकि उन्होंने इस बात का कभी दावा नहीं किया कि उन्होंने ही अमिताभ को दिशा दिखाई थी.”

अपने कॉलेज को छोड़ने के इतने साल बाद भी अमिताभ फ्रैंक ठाकुरदास का आभार मानते हैं कि उन्होंने मिरांडा हाउस कॉलेज के एकांकी नाटक में भाग लेने के लिए उनका नाम दिया था. दो साल पहले कॉलेज के दिनों को याद करते हुए अभिताभ ने मुस्कुराते हुए कहा था, “मैं यह कैसे भूल सकता हूं कि उन्होंने ही मिरांडा हाउस में एकांकी नाटक में भाग लेने के लिए मेरा नाम भेजा था.”

एमएएनयूयू के कुलाधिपति ने उनके बारे में बताया

लंबे व रूपवान फ्रैंक ठाकुरदास जिंदादिल शिक्षक थे, जो अपने पुराने और वर्तमान छात्रों के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे. उनकी जिंदगी उनके छात्रों के इर्द-गिर्द ही घूमती थी. मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (एमएएनयूयू) के कुलाधिपति डॉ. फिरोज बख्त अहमद ने उनके बारे में बताया, “साल 1975 में फ्रैंक सर मेरे शिक्षक थे. वह हमें अंग्रेजी कविता पढ़ाते थे.

वह अंग्रेजी कविता और नाटकों के बारे में सब कुछ जानते थे. शेक्सपियर, रुडयार्ड किपलिंग, रॉबर्ट बर्न्‍स, ऑस्कर वाइल्ड, जॉन मिल्टन, जॉन कीट्स पर उनकी अच्छी पकड़ थी. हमारी कक्षाएं लेने के बाद, वह अपने छात्रों के साथ हिंदी नाटक की रिहर्सल के लिए दौड़ पड़ते थे.”

उन्होंने आगे कहा, “वह बहुत ही अच्छे पंजाबी गायक भी थे, जिन्होंने समर्पण की भावना के साथ छात्रों की कई पीढ़ियों को प्रशिक्षित किया और किरोड़ीमल कॉलेज के नाटक, वाद-विवाद और संगीत की प्रतिष्ठा स्थापित की.”

निश्चित तौर पर, फ्रैंक ठाकुरदास एक महान शिक्षक और सलाहकार थे. केएम कॉलेज में उनके नाम पर बना ऑडिटोरियम जब खस्ताहाल था और उसे मरम्मत की तत्काल जरूरत थी, तब अमिताभ बच्चन ने खुद आगे बढ़कर 51 लाख रुपये दान दिए थे, ताकि इसे भव्य तरीके से बनाया जा सके.

सिर्फ अमिताभ बच्चन ने ही नहीं, फ्रैंक ठाकुर दास के कई छात्रों ने कॉलेज ऑडिटोरियम के लिए धनराशि की सहायता की थी.

फिल्म लेखक और आलोचक फजले गुफरान कहते हैं, “अत्यंत दुख की बात है कि कुछ लोगों को उनके किए का श्रेय नहीं मिलता है. फ्रैंक ठाकुर दास उन लोगों में से थे, जिनकी कीर्ति के बारे में किसी ने नहीं सुना. उन पर किसी को बायोग्राफी लिखनी चाहिए और अमिताभ बच्चन को उसकी प्रस्तावना लिखनी चाहिए, ताकि फिल्म के शौकीनों को एक महान शिक्षक के जीवन और समय के बारे में पता चल सके.”

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