b’day spl: किशोर कुमार से डरते थे फिल्मी पर्दे पर अपना दबदबा रखने वाला महमूद

‘किस्मत’ में अभिनेता अशोक कुमार के बचपन की भूमिका निभाने का मौका मिला

नई दिल्लीः बतौर बाल कलाकार अपने सिने करियर की शुरूआत करने वाले महमूद, जिन्होंने अपने विशिष्ट अंदाज, हाव-भाव और आवाज से लगभग पांच दशक तक दर्शकों को भरपूर मनोरंजन किया। आज उनका जन्मदिन है।

वर्ष 1933 में जन्मे महमूद के पिता मुमताज अली बॉम्बे टॉकीज स्टूडियो में काम किया करते थे। घर की आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिये महमूद, मलाड और विरार के बीच चलने वाली लोकल ट्रेन में टॉफिया बेचा करते थे।

बचपन के दिनों से ही महमूद का रूझान अभिनय की ओर था और वह अभिनेता बनना चाहते थे। अपने पिता की सिफारिश की वजह से महमूद को बॉम्बे टाकीज की वर्ष 1943 में प्रदर्शित फिल्म ‘किस्मत’ में अभिनेता अशोक कुमार के बचपन की भूमिका निभाने का मौका मिल गया।

भारतीय सिनेमा में महमूद जैसा कोई हास्य अभिनेता नहीं हुआ. उन्होंने फिल्मी पर्दे पर दर्शकों को खूब हंसाया और रुलाया भी. उस दौर में महमूद एक-मात्र हास्य अभिनेता थे, जिनकी मौजूदगी भर से दर्शक चहक उठते थे. आज ही के दिन 1932 में कॉमेडी के इस बादशाह का जन्म हुआ था. वह करीब 300 हिंदी फिल्मों में नजर आए.

हीरो से ज्यादा मिलता था पैसा

उनकी शख्सीयत और अभिनय ऐसा था कि थियेटर में मुख्य हीरो से ज्यादा दर्शक उनके लिए तालियां बजाते थे. फिल्म नर्देशक भी यह बात बखूबी जानते थे. इसलिए फिल्म हिट कराने के लिए महमूद को फिल्म में लेने के लिए तैयार रहते थे और उन्हें हीरो से ज्यादा पैसे देते थे.

किशोर कुमार के थे बड़े प्रशंसक

तब के बड़े-बड़े अभिनेता भी उनका लोहा मानते थे और उनसे भय खाते थे. सेट पर उनकी मौजूदगी में हीरो अपनी शर्ट की बटन बंद करना नहीं भूलते थे. पर क्या आप जानते हैं कि फिल्मी पर्दे पर ऐसा दबदबा रखने वाले महमूद भी किसी से डरते थे. वह थे किशोर कुमार.

एक बार महमूद ने किशोर कुमार के बारे में कहा था, ‘मैं सभी अभिनेताओं के बारे में जानता हूं कि कौन कितने पानी में हैं. पर किशोर कुमार का पता लगाना थोडा मुश्किल है. वो कभी कुछ भी कर जाते हैं अपने किरदार के साथ.’ महमूद और किशोर कुमार ने फिल्म पड़ोसन में साथ काम किया था. तभी तो यह फिल्म बहुत सफल रही.

अपने आखिरी दिनों में भी वह फिल्मों को लेकर उत्साहित रहते थे. वह कहते थे कि जिंदगी में गम बहुत है. इसलिए कुछ भी हो जाए, हर हाल में मुस्कराते रहें. इसी मूलमंत्र के साथ उन्होंने अपनी असल जिंदगी को फिल्मी पर्दे पर जिया और लोगों का खूब मनोंरजन किया.

अमिताभ बच्चन को फिल्म में दिया काम

सीआईडी उनकी पहली फिल्म थी, पर वह 1943 में आई फिल्म किस्मत में बतौर बाल कलाकार काम चुक थे. बचपन में ही अभिनय से उनका नाता जुड़ गया था. उनके पिता भी एक नामी मंच अभिनेता थे. कह सकते हैं कि अभिनय की कुछ समझ उन्हें अपने पिता से भी मिली थी.

अभिनय में हाथ आजमाने से पहले वह मीना कुमारी के टेनिस कोच थे, निर्देशक पीएल संतोषी के ड्राइवर थे. सिनेमा का इतना बड़ा सितारा बहुत नीचे से ऊपर पहुंचा था. इसलिए वह इंडस्ट्री में नए कलाकारों की मदद करने से भी पीछे नहीं रहते थे. जब अमिताभ बच्चन फिल्मों में स्ट्रगल कर रहे थे, तब महमूद ने उन्हें अपने घर में आसरा दिया और फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ में बतौर मुख्य हीरो काम भी दिया.

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