अभिभावक रहें सावधान बच्चों पर अधिक दबाव डालने से हो सकता है नुकसान

बच्चों पर हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव डालकर हम अभिभावक कम उम्र में उन्हें तनाव का शिकार बना रहे हैं।

हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा परीक्षा से लेकर डांस, स्पोट्र्स, म्यूजिक, मार्शल आर्ट… हर चीज में अच्छा प्रदर्शन करे।

लेकिन, ऐसा भला कैसे संभव है? बच्चों पर हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव डालकर हम अभिभावक कम उम्र में उन्हें तनाव का शिकार बना रहे हैं।

हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा परीक्षा से लेकर डांस, स्पोट्र्स, म्यूजिक, मार्शल आर्ट… हर चीज में अच्छा प्रदर्शन करे। लेकिन, ऐसा भला कैसे संभव है?

बच्चों पर हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव डालकर हम अभिभावक कम उम्र में उन्हें तनाव का शिकार बना रहे हैं। अगर आप चाहती हैं कि बच्चा सुपरहिट बने, तो पहले खुद सुपर पेरेंट्स बनें।

आपको है बच्चे की मानसिक सेहत की चिंता?

कहीं ऐसा तो नहीं कि आप अपने नौनिहाल की मानसिक अवस्था से अनभिज्ञ हों? कहीं आप ये तो नहीं सोचतीं कि बच्चों को तो केवल स्कूल में मौज-मस्ती करनी होती है,

जबकि आप ऑफिस में काम के अत्यधिक दबाव में रहती हैं? यदि आप का जवाब हां है तो आप पूरी तरह से गलत हैं।

आज के समय में सिर्फ बड़े ही नहीं, बच्चे भी तनाव में रहते हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार, ‘जरूरत से ज्यादा आशाएं, ज्यादा उम्मीदें और अत्यधिक चिंताएं बच्चों में तनाव की खास वजह हैं।

वहीं आत्मसम्मान की जंग बच्चों का शानदार प्रदर्शन आज के समय का अनिवार्य मानक बन चुका है।

इस प्रेशर के कारण जब बच्चे बेहतरीन प्रदर्शन नहीं कर पाते, तब भावनात्मक सपोर्ट की कमी और अभिभावक का स्वभाव उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है।

इस वजह से कई बच्चे कुछ ऐसा कदम भी उठा लेते हैं, जो उन्हें नहीं उठाना चाहिए।

पूरी नींद न लेना बेहतरीन कॉलेजों और संस्थानों में दाखिले का तनाव या अच्छे नंबर लाने के दबाव के कारण बच्चे देर रात तक पढ़ाई करते हैं|

परिणामस्वरूप वे पर्याप्त नींद न मिलने के कारण मानसिक अवसाद से ग्रस्त हो जाते हैं। नींद की कमी का असर उनकी शारीरिक और मानसिक दोनों सेहत पर पड़ता है।

दर्द को अनदेखा करना जिंदगी की अनिश्चितता, वर्तमान में संघर्ष और बिखरा हुआ भविष्य छात्रों या बच्चों को बिल्कुल तोड़ देता है।

कक्षा में प्रथम आने से लेकर सांस्कृतिक और कलात्मक क्रिया-कलापों में सक्रिय रहने का दबाव छात्रों से उनकी नैसर्गिक प्रतिभा छीन लेता है।

नकल की आशंका जब ध्यान उपलब्धि पर होता है तो सीखने के बजाय बच्चे सफलता प्राप्त करने के लिए आसान रास्ते की तलाश करते हैं।

चाहे वह छोटा बच्चा हो या बड़ा, वह नकल करने में कोई बुराई नहीं समझता, भले ही नकल की कॉपी को खरीदना ही क्यों न पड़ जाए।

आत्महत्या का खतरा पढ़ाई जरूरी है, लेकिन पढ़ाई के नाम पर बच्चे को मशीन बना देना गलत है। बच्चों को जिस एक चीज से आजकल सबसे अधिक डर लगता है, वह है नाकामयाब होने का डर।

आपकी उम्मीदों को पूरा नहीं करने का डर उन्हें कुछ गलत कदम उठाने पर भी मजबूर कर सकता है। इसलिए अपने बच्चे पर अधिक जवाब न बनाएं।

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