बैंक बंद होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में नोटबंदी जैसा हाल, किसान क़िस्त में पेसे लेने को मजबूर

रोजमर्रा एवं जेब खर्च की राशि के लिए भी लोगों को यहां वहां भटकते देखा जा सकता है।

कोण्डागांव/राज शार्दूल

बैंकों में नगद राशि नहीं मिलने से व्यापारी किसानों के अलावा कर्मचारी अधिकारी भी परेशान दिख रहे हैं। रोजमर्रा एवं जेब खर्च की राशि के लिए भी लोगों को यहां वहां भटकते देखा जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है। व्यापारियों एवं किसानों को ज्यादा ही परेशानी हो रही है कुछ व्यापारियों ने बताया कि वह बस्तर के बाहर खाता खुलवा कर यहां से रकम आरटीजीएस करवाने के पश्चात धमतरी कांकेर एवं अन्य शहरों से राशि आहरण कर रहे हैं।

विकास कार्यों पर भी दिख रहा असर : 

क्षेत्र के लोग लगभग पखवाड़े भर से कैश की किल्लत को झेल रहे हैं। जिला मुख्यालय एवं शहरी क्षेत्रों में स्थिति तो कुछ ठीक-ठाक दिख रही है क्योंकि यहां अन्य उपभोक्ताओं के द्वारा जमा राशि जमा की जाती है

जिससे लेनदेन का कार्य कुछ हद तक चलता रहता है। किंतु ग्रामीण क्षेत्र की बैंक की शाखाओं में बाहर से राशि बहुत कम जमा हो पाती है जिसके चलते यहां उपभोक्ताओं को नगद राशि देने में बैंक शाखाओं के पसीने छूट रहे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक एवं जिला सहकारी बैंक हितग्राहियों की समस्या को गंभीरता से लेते नहीं दिख रहे। बैंकों की लापरवाही का आलम यह है कि नगद राशि की भुगतान में लेट लतीफ तो करते ही हैं वहीँ अन्य बैंकों के आए हुए चेक के कलेक्शन में भी लापरवाही बरत रहे हैं।

जनपद पंचायत विश्रामपुरी से मिली जानकारी के अनुसार अतिरिक्त केंद्रीय सहायता योजना के अंतर्गत कलेक्टर कार्यालय के द्वारा 7लाख 8 हजार 5 सौ आठ रुपए का चेक एक्सिस बैंक के नाम पर प्रदान किया गया था।

यह चेक जनपद पंचायत को 20 दिसंबर को मिली थी जिसे दो दिन बाद जिला सहकारी बैंक की शाखा विश्रामपुरी में जमा किया गया एक माह बाद भी उक्त राशि का अता पता नहीं है।

जनपद से जुड़े अधिकारियों के द्वारा इस संबंध में बैंक से पूछताछ की जाती है तो संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता जिससे वह परेशान हैं वहीं पंचायत को यह राशि नहीं मिलने से विकास कार्य ठप पड़ा है।

इसी प्रकार आदिवासी उपयोजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक को एक माह पूर्व लगभग 6लाख का चेक दिया गया था। उक्त राशि को भी संबंधित के खाते में नहीं डाली गई है।

राशि के लिए बैंक का कई चक्कर काट चुके हैं किंतु बैंक के अधिकारियों के उदासीन रवैया के चलते जनपद पंचायत एवं संबंधित ग्राम पंचायत को उक्त राशि नहीं मिल पा रही है।

किश्तों में मिल रही है किसानों को धान की रकम :

क्षेत्र के किसान धान बेचकर नगद राशि के लिए तरस रहे हैं।

शहरी क्षेत्र एवं जिला मुख्यालय के आसपास की स्थिति कुछ हद तक ठीक है किंतु ग्रामीण क्षेत्र एवं कस्बाई क्षेत्रों में किसान नगद राशि के लिए बेहद परेशान हैं।

किसानों की स्थिति को देखें तो लगता है कि नोटबंदी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। कई किसानों ने कहा कि ऐसी स्थिति नोटबंदी के समय भी देखी गई थी नगर पंचायत क्षेत्र फरसगांव विश्रामपुरी एवं माकड़ी क्षेत्र में किसानों के अलावा व्यापारियों एवं अधिकारी कर्मचारियों को भी नगद राशि के लिए भटकते देखा गया।

जिला सहकारी बैंक के शाखा माकड़ी में किसानों को नगद राशि के लिए परेशान देखा गया। जहां लोग धान बेचकर राशि को किस्तों में ले जा रहे हैं। घर का कामकाज छोड़कर किसान बैंकों का चक्कर काट रहे हैं।

कुछ लोग 35 किमी की दूरी तय कर कोण्डागांव पहुंच कर एटीएम से रकम निकाल रहे हैं। माकड़ी एवं विश्रामपुरी के किसानों ने बताया कि उन्हें कभी 5 हजार तो कभी 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।

जिला सहकारी बैंक माकड़ी शाखा के अंतर्गत चंदापुर निवासी अनंतराम एवं सिवनी मारा गांव के सनत कुमार, मनसरी बाई उडीद गांव ने बताया कि वे धान तो बेच चुके हैं किंतु नगद राशि के लिए बैंक का चक्कर काटना पड़ रहा है।वे किस्तों में पैसे ले जा रहे हैं।

अधिकारी भी रकम के लिए परेशान:

जनपद पंचायत विश्रामपुरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एके ठाकुर ने बताया कि वह स्वयं के बचत खाते से राशि निकालने के लिए विश्रामपुरी स्थित स्टेट बैंक गए थे|
जहां राशि नहीं मिलने पर उन्होंने एटीएम का रुख किया तो पता चला कि एटीएम पखवाड़े भर से ज्यादा समय से बंद है तत्पश्चात वे केशकाल स्थित एटीएम पर गए, जहां लंबी लाइन को देखते हुए वे बैरंग वापस लौटे तथा किसी से उधार लेकर अपना काम निपटाया।

बांसकोट के संतोष साहू ने बताया कि पैसा नहीं मिलने से वे धमतरी में खाता खुलवा कर रखे हैं ।यहां से रकम आरटीजीएस करने के पश्चात वह धमतरी जाकर रकम निकाल लेता है।

बंद पड़े हैं एटीएम :

फरस गांव एवं विश्रामपुरी स्थित एटीएम पखवाड़े भर से बंद पड़े हैं। करेंसी नहीं होने के कारण यहां रकम नहीं डाला जा रहा है। जिससे इन्हें बंद करना पड़ा है।

फरसगांव जो कि नगर पंचायत क्षेत्र है तथा नेशनल हाईवे पर स्थित होने के कारण एटीएम में लोग लेनदेन करते है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

फरस गांव में यह स्टेट बैंक के द्वारा संचालित एकमात्र एटीएम है जिसके बंद होने से उपभोक्ताओं को खासकर बाहर से आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

विश्रामपुरी स्थित एटीएम भी लगभग 20 से 25 दिनों से बंद पड़ा है।यहां जिला सहकारी बैंक एवं ग्रामीण बैंक के द्वारा उपभोक्ताओं को एटीएम कार्ड जारी किया गया है।

जिसे लेकर लोग भटकते रहते हैं तथा कई दफे एटीएम का चक्कर काट कर वापस लौट जाते हैं।

करेंसी नहीं आने से है परेशानी :

कैश की समस्या के संबंध में भारतीय स्टेट बैंक प्रबंधन ने स्थिति में शीघ्र सुधार होने की उम्मीद जताई है।

स्टेट बैंक की शाखा केशकाल के फील्ड ऑफिसर एवं विश्रामपुरी के प्रभारी विवेक स्वामी ने बताया कि करेंसी अभी बाहर से ही नहीं आ रहा है।

संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण हेलीकॉप्टर से बस्तर में करेंसी पहुंचता है किंतु किन्ही कारणों से इस समय पहुंचने में देर हो चुकी है।

जिसके चलते कुछ समस्या निर्मित हुई है जैसे ही करेंसी पहुंचेगा पूरी समस्या स्वत समाप्त हो जाएगी तथा लोगों को मनचाही रकम मिल पाएगी।

1
Back to top button