न्याय की मशाल बन ‘टेली-लॉ सेवा’ देश भर में फैला रही है कानून का उजाला

इसके माध्यम से कमजोर तबके के किसी भी जरूरत मंद को सरकार द्वारा कानूनी सलाह और मशविरा उपलब्ध कराया जाता है।

दिल्ली : जिस तरह से अन्याय एक समाज के बिखराव का कारण होता है, तो वहीं न्याय एक सशक्त राष्ट्र का आधार होता है। ऐसा समाज जहां संसाधन सीमित होने के अलावा असमान बंटे हुए हो, अन्याय की संभावना को और भी बढ़ा देते हैं। खासतौर से उस समुदाय के लिए जो कमजोर व अशिक्षित है और जिसे लगता है कि देश के लिए उसका कोई महत्व ही नहीं है। ऐसे में एक मजबूत राष्ट्र की संकल्पना नहीं की जा सकती। एक मजबूत राष्ट्र की आकांक्षी सरकार के लिए हर तबके को मुख्यधारा से जोड़ना पहला कर्तव्य है, और इसी उद्देश्य को पूरा करती भारत सरकार की एक स्कीम है ‘टेली-लॉ’ सेवा।

मंगलवार को “आजादी का अमृत महोत्सव” की शुरुआत करते हुए और टेली-लॉ कार्यक्रम के तहत 9 लाख से अधिक लाभार्थियों तक पहुंचने का नया कीर्तिमान बनने के अवसर पर न्याय विभाग ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया।

क्या है टेली-लॉ सेवा ?

दरअसल, टेली-लॉ सरकार की एक ऐसी योजना है, जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर तबके तक न्याय सुनिश्चित कराना है। इसके माध्यम से कमजोर तबके के किसी भी जरूरत मंद को सरकार द्वारा कानूनी सलाह और मशविरा उपलब्ध कराया जाता है। टेली-लॉ , टेलीफोन अथवा विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा वकील की मदद भी मुहैया कराई जाती है। अशिक्षित और गरीब, जिनके लिए कानूनी दांव-पेंच डर और शोषण का दूसरा नाम होते हैं, उनके डर को दूर करने और शोषण मुक्त समाज की स्थापना करना इस योजना का मुख्य ध्येय है। इस सेवा का लाभ ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ जो ग्राम पंचायत स्तर पर होते हैं, के माध्यम से उठाया जा सकता है।

9.5 लाख लोग हुए लाभान्वित

टेली-लॉ ने पिछले एक साल के दौरान कानूनी सलाह लेने वाले लाभार्थियों की संख्या में 369% की वृद्धि देखी है। टेली-लॉ का व्यापक रूप से आम नागरिकों द्वारा कोविड महामारी के दौरान अपने अधिकारों और अधिकारों का दावा करने के लिए उपयोग किया गया। हमने जून, 2021 में एक नया कीर्तिमान बनाया है, जिसमें 9.5 लाख से अधिक नागरिक टेली-लॉ से लाभान्वित हो रहे हैं।

देश के 633 जिलों में चल रही है टेली-लॉ सेवा

टेली-लॉ कार्यक्रम वर्तमान में 50,000 सीएससी के नेटवर्क के माध्यम से 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 633 जिलों (115 आकांक्षी जिलों सहित) में संचालित हो रहा है। यह कार्यक्रम आम सेवा केंद्रों (सीएससी) में उपलब्ध ई-इंटरफेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से पैनल वकीलों से कानूनी सलाह लेने वाले वंचित और जरूरतमंदों को जोड़ता है।

‘टेली-लॉ’ सेवा का लाभ देश की 22 भाषाओं में उपलब्ध

बिना अपना कीमती समय और पैसा गवाएं कोई भी व्यक्ति जिसे कानूनी सलाह की जरूरत हो, इस सेवा का लाभ ले सकता है। लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट 1987 के सेक्शन 12 के तहत जो भी व्यक्ति मुफ्त कानूनी सलाह के उपयुक्त हैं, उनके लिए यह सेवा निशुल्क (फ्री ) है। अन्य सभी के लिए नाममात्र की फीस 30 रुपये रखी गई है। टेली-लॉ सेवा का लाभ देश की 22 भाषाओं में उपलब्ध है।

क्या है मदद लेने की प्रक्रिया ?

केस दर्ज करने से पहले पैरा-लीगल वालंटियर (PLV) आवेदनकर्ता से मिलते हैं और उन्हें एक निश्चित तारीख व समय देते हैं। इसके बाद उस तारीख व समय पर आवेदनकर्ता कॉमन सर्विस सेंटर पहुंचते हैं, जहां उन्हें पैनल के वकील द्वारा कानूनी सलाह दी जाती है। इस प्रकार यह चक्र चलता रहता है।

क्या है कॉमन सर्विस सेंटर ?

कॉमन सर्विस सेंटर उन दुकानों/ कियोस्क को कहते हैं जो गांव या दूरदराज के इलाके में विभिन्न ऑनलाइन सरकारी योजनाओं/सेवाओं को लोगों तक पहुंचाते हैं। कॉमन सर्विस सेंटर, सूचना एवं तकनीकी मंत्रालय के द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान के तहत एक मिशन प्रोजेक्ट है। कॉमन सर्विस सेंटर ग्राम पंचायत स्तर पर स्थापित किए गए हैं। देशभर में ऐसे लगभग 3.19 लाख कॉमन सर्विस सेंटर हैं।

किस तरह के मामलों में मदद ले सकते हैं ?

टेली-लॉ सेवा के द्वारा आप हर तरह के कानूनी मामलों में मदद ले सकते हैं। मुख्य बिन्दु निम्नानुसार हैं –

– दहेज, पारिवारिक विवाद, तलाक और घरेलू हिंसा के मामले में
– कार्यस्थल या किसी भी अन्य जगह यौन हिंसा
– महिलाओं, बच्चे और बुजुर्गों के भरण-पोषण से संबंधित मामले
– संपत्ति और जमीन के अधिकार संबंधित मामले
– महिला/पुरुष के बराबर वेतन का मामला
– बाल मजदूरी, बाल विवाह के खिलाफ मामले
– एफआईआर दर्ज करने संबंधी मामले
– एससी/एसटी पर अत्याचार संबंधित मामले

इस प्रक्रिया के दौरान आवेदनकर्ता के द्वारा प्रदान की गई व्यक्तिगत सूचना पूरी तरीके से गुप्त रखी जाती है।

केन्द्रीय मंत्री ने सभी सहयोगियों की सराहना की

इस अवसर पर बोलते हुए, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई), अर्ध-न्यायिक स्वयंसेवकों ( पीएलवी), राज्य समन्वयकों (स्टेट कोऑरडीनेटर्स) और पैनल वकीलों के प्रयासों की सराहना की, जो आम नागरिकों की दिन-प्रतिदिन की सामाजिक-कानूनी चिंताओं/ हल कर रहे हैं। साथ ही विभिन्न योजनाओं के तहत जनता के लिए शुरू किए गए लाभों को जनता तक पहुंचाने वालों की भी हौसला अफजाई की। केन्द्रीय मंत्री ने न्याय वितरण के समावेशी चरित्र को बढ़ावा देने और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए टेली लॉ की क्षमता का भी विशेष उल्लेख किया।

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