आशुतोष से पहले अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ चुके हैं ये बड़े चेहरे

नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी (आप) के प्रवक्ता आशुतोष ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, आप संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया है और कहा है कि इस जीवन में ऐसा संभव नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आशुतोष लंबे समय से पार्टी में हाशिए पर चल रहे थे और पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे।
चर्चा है कि आशुतोष फिर से पत्रकारिता में लौट सकते हैं। उन्होंने 2014 में पत्रकारिता छोड़कर आप के जरिए राजनीति में एंट्री ली थी। इन्हें आप के संस्थापकों में गिना जाता है। वैसे आप के कई संस्थापक सदस्य अरविंद केजरीवाल से किनारा कर चुके हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने चंदा देकर आप के आंदोलन को खड़ा किया था और पार्टी बनवाई थी।

शांति भूषण
पूर्व कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वकील शांति भूषण ने आम आदमी पार्टी की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपए चंदा दिया था लेकिन बहुत जल्द ही उनका आप से मोहभंग हो गया था। उन्होंने 2014 में ही पार्टी छोड़ दी थी। तब उन्होंने अरविंद केजरीवाल के अनुभवहीन, धांधलीबाज और मनमानी करनेवाला बताया था।

प्रशांत भूषण
आप के स्थापना काल में पार्टी के थिंक टैंक समझे जाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण का आप से साल 2015 में ही संबंध विच्छेद हो गया था। आप की स्थापना कराने और उससे पहले यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगाने में अक्सर प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान प्रशांत भूषण सक्रिय दिखते थे लेकिन दिल्ली की सत्ता पाने के बाद केजरीवाल से उनके मतभेद हो गए। प्रशांत भूषण ने टिकट बंटवारे में मनमानी का आरोप लगाया तो केजरीवाल ने उन्हें पार्टी की पीएसी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर दिया। इसके बाद उन्होंने स्वराज अभियान की शुरुआत की।

प्रो. आनंद कुमार
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर रहे आनंद कुमार ने भी अन्ना आंदोलन और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में हिस्सा लिया था और आप की स्थापना में बढ़चढ़ कर भूमिका निभाई थी लेकिन 2015 में प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के साथ उन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर आप से निकाल दिया गया था।

मयंक गांधी
सामाजिक कार्यकर्ता मयंक गांधी इंडिया अगेन्स्ट करप्शन मूवमेंट से जुड़े रहे हैं। जब आप की स्थापना हुई तब उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य बनाया गया था लेकिन अरविंद केजरीवाल के मनमानी रवैये से परेशान होकर गांधी ने नवंबर 2015 में पार्टी छोड़ दी थी।

शाजिया इल्मी
पत्रकारिता छोड़कर लोकपाल और अन्ना आंदोलन में कूदने वाली शाजिया इल्मी भी आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य थीं। 2014 में लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद केजरीवाल पर पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र को खत्म करने का आरोप लगाया था और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

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