इस्लाम अपनाने से पहले यूं जश्न मानते थे अरब के लोग

रमजान की समाप्ति के साथ ही ईद-उल-फित्र का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार ईद वीकेंड पर पड़ रही है तो जाहिर है, छुट्टियां बढ़ने से लोगों की खुशी में भी बढ़ोतरी होगी। खैर, आज हम बात करते हैं कि अरब के लोगों के धार्मिक रिवाज कैसे थे इस्लाम को अपनाने से पहले, साथ ही क्या है.

नए चांद की नई चमक : नए चांद की रौशनी देखकर ईद मनाई जाएगी और ईद-उल-फित्र के दिन एक महीने से चला आ रहा रामदान का फास्टिंग शेड्यूल खत्म हो जाएगा। क्या आपको पता है ईद-उल-फित्र का मतलब क्या है?

ईद-उल-फित्र का मतलब : अरबी भाषा में ईद का मतलब होता है बार-बार लौटकर आना और फित्र का मतलब होता है ब्रेकफास्ट यानी नाश्ता। इस मायने में ईद को खुशियों की दावत का वह दिन कह सकते हैं, जो बार-बार लौटकर आता है।

ऐसे शुरू होता है खुशियों का दौर : सुबह की नमाज के साथ एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी जाएगी। फिर पड़ोसियों, रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाने और त्योहार मनाने का दौर शुरू होगा।

इस्लाम से पहले अरब : इस्लाम धर्म अपनाने से पहले अरब के लोग दो दिन खुशियां मनाते थे। एक नौरोज के दिन और दूसरा मेहरजान के दिन।

नौरोज मनाने का दिन : नौरोज उस दिन को मनाते थे जब सूरज मेष राशि में प्रवेश करता था और मेहरजान उस दिन जब सूरज तुला राशि में प्रवेश करता था।

फिर हुई यह परंपरा शुरू : इस्लाम अपनाने के बाद इन दो दिन की बजाय ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा मनाने की परंपरा शुरू हुई।

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