चने का उत्पादन बढ़ाने कृषि वैज्ञानिकों ने दी जानकारी

चने की खेती में बीजोपचार के लिए सर्वप्रथम फफूंदनाशक, राइजोबियम, ट्रायकोडर्मा से उपचार करना उचित होता है।

बेमेतरा : एक्सटेंशन रिफार्म्स (आत्मा) के घटक बी 11 के अंतर्गत कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन कृषि महाविद्यालय ढोलिया बेमेतरा (छ.ग.) में गत दिवस को आयोजित किया गया।

इस परिचर्चा में अधिष्ठाता डॉ.के.पी.वर्मा, तथा डॉ.संजीव मलैया ने परिचर्चा में भाग लिया। डॉ. संजीव मलैया कृषि वैज्ञानिक द्वारा चने में कतार एवं पौध से पौध की दूरी 50ग20 से.मी. रखना तथा चने की निपिंग बोआई के 30 दिन बाद करना तथा चने को अधिक पानी की जगह सिमित मात्रा में पानी दिया जाना है।

चने की खेती में बीजोपचार के लिए सर्वप्रथम फफूंदनाशक, राइजोबियम, ट्रायकोडर्मा से उपचार करना उचित होता है। जिससे चने का उत्पादन अधिक होगा।

परिचर्चा में उपस्थित वैज्ञानिक डॉ. के.पी.वर्मा द्वारा किसानों को स्वयं के द्वारा घर पर ही कम लागत में ट्रायकोडर्म (मित्र कवक), स्यूडोमोनास (मित्र जीवाणु) के उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी गई। कृषक भाईयों से पराली न जलाकर उसमें ट्रायकोडर्म, वेस्ट डिम्पोसर से उपचारित कर खेत में ही उसका उपयोग खाद के रूप में उपयोग करने की सलाह दी गई।

कृषकों से अनुरोध किया कि वे जैविक पद्धति से खेती को बढ़ावा दें। जिससे मृदा एवं स्वयं का स्वास्थ्य बना रहे। घर की बाड़ी मं साग सब्जी अवश्य लगाएं जिससे परिवार के सदस्यों की पोषक तत्व अधिक मात्रा में मिल सके। अंत में किसानों द्वारा कृषि वैज्ञानिकों का धन्यवाद किया गया, इस पकार परिचर्चा समाप्त की गई।

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