निजी क्षेत्र में बेहतर पेंशन की राह आसान नहीं

EPS पेंशन पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा EPFO

नई दिल्ली : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ईपीएस पेंशन योजना के तहत सम्मानजनक पेंशन पाने की उम्मीद कर रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को झटका लग सकता है। ईपीएस पर केरल हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने वाले वाले फैसले के खिलाफ ईपीएफओ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने जा रहा है। यह याचिका लोकसभा चुनावों के बाद कभी भी दाखिल हो सकती है।

केरल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ईपीएस स्कीम के तहत नियोक्ता का योगदान पूरे वेतन से किए जाने का आदेश दिया था और इस पर लागू 15,000 रुपये की सीमा को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ ईपीएफओ ने सुप्रीमकोर्ट में अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था।

केरल हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद ईपीएस स्कीम में बेहद मामूली पेंशन से निराश निजी क्षेत्र के कर्मचारियों में हर्ष की लहर व्याप्त हो गई थी, क्योंकि इससे उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो गया था। अभी 15,000 रुपये की सीमा के कारण निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को रिटायर होने के बाद ईपीएस पेंशन के रूप में एक हजार रुपये से लेकर अधिकतम तीन हजार रुपये तक की पेंशन मिलती है, क्योंकि उक्त सीमा के कारण पेंशन कोष में नियोक्ता की ओर से अधिकतम 1,250 रुपये का योगदान किया जाता है।

हाईकोर्ट ने 1995 के ईपीएस एक्ट के मूल प्रावधान का हवाला देते हुए इसे गलत माना और 2014 में किए गए उस संशोधन को खारिज कर दिया जिसके तहत योगदान के लिए वेतन पर 15,000 रुपये की सीमाबंदी लागू कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि ईपीएस के तहत नियोक्ता का योगदान कर्मचारी के पूरे वेतन से लिया जाएगा और इसके लिए अंतिम वर्ष के औसत मासिक वेतन को आधार बनाया जाएगा।

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