बसपा से तालमेल की खबरों के बीच बेलतरा में कांग्रेस के ब्राह्मण नेताओं की बढ़ी नाराजगी

बैठकों का दौर, कांग्रेस के आला नेताओं तक पहुंचाई जाएगी जानकारी

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सैम विलियम
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बिलासपुर। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच चुनावी तालमेल और बेलतरा विधानसभा सीट बसपा के खाते में जाने की अटकलबाजी मात्र से ही ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों की नाराजगी बढ़ने लगी है।

इस सीट को लेकर सामाजिक नेताओं की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी से ही बैठकों का दौर शुरू हो गया है।

भीतर ही भीतर कांग्रेस समर्थित सामाजिक नेताओं का गुस्सा भी फूटने लगा है। बिलासपुर जिले के नक्शे पर सात विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

इसमें दो विधानसभा को अजजजा व अजा के लिए आरक्षित रखा गया है। मस्तूरी अनूसूचित जाति के लिए और मरवाही सीट को अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

शेष पांच विधानसभा क्षेत्र को सामान्य घोषित किया गया है। इसमें बिलासपुर,बिल्हा,बेलतरा,तखतपुर व कोटा सीट है।

भाजपा व कांग्रेस की राजनीति पर गौर करें तो बिलासपुर सीट को कांग्रेस ने दो दशक से भी अधिक समय से ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को ही यहां से टिकट मिलते आ रहा है।

कुछ इसी तरह की स्थिति बिल्हा विधानसभा क्षेत्र की भी है। तखतपुर व कोटा में सामान्य वर्ग से उम्मीदवार आते रहे हैं।

पहले सीपत और अब बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के संबंध में आश्चर्यजनक ढंग से ब्राह्मण वर्ग की परंपरागत सीट को कांग्रेसी नेताओं की जिद के चलते ओबीसी करार दे दिया गया।

राज्य निर्माण के बाद से ही यह परंपरा टूटी जो आजतक जारी है। बेमेल निर्णय और नई परिपाटी चलाने की जिद ने बेलतरा कांग्रेस के हाथ से निकल गया ।

जैसे.जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते आ रहा है कांग्रेस और बसपा के बीच चुनावी तालमेल को लेकर भी अटकलबाजी का दौर जारी है।

इस बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि राज्य में बसपा के साथ गठबंधन की स्थिति में बेलतरा कहीं बसपा के कोटे में न चली जाए ।

सियासी चर्चा की गंभीरता और बेलतरा सीट को परंपरागत सीट में तब्दील करने की जिद क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं में दिखाई देने लगी है।

सीट बसपा के खाते न जाए और इस बार ब्राह्मण चेहरा को सामने लाने के लिए सामाजिक नेताओं ने ताल ठोंक दी है।

इसी के तहत बीते दिनों छत्तीसगढ़ सरयूपारीण विप्र संघ खारंग परिक्षेत्र की बैठक ग्राम सेमरा में हुई । बैठक के लिए दो एजेंडा तय किया गया था।

पहले नंबर पर केंद्र द्वारा जारी एससी एसटी एक्ट के लिए लाए गए अध्यादेश की वापसी व बेलतरा विधानसभा सीट से इस बार ब्राह्मण प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय लिया गया है।

बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी कांग्रेस के आला नेताओं तक पहुंचाने की रणनीति भी तय की गई है।

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