भरथरी गायिका सुरुज बाई खांडे का निधन

एकमात्र भरथरी गायिका सुरुज बाई खांडे का बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में शनिवार की सुबह में निधन हो गया। वह 69 साल की थीं

एकमात्र भरथरी गायिका सुरुज बाई खांडे का बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में शनिवार की सुबह में निधन हो गया। वह 69 साल की थीं। बताया जाता है कि खांडे का निधन हृदयघात से हो गया। उनके निधन पर सीएम रमन ने शोक जताते हुए श्रद्धांजलि दी है। उनके निधन से प्रदेश और देश की अपूरणीय क्षति हुई है। प्रदेश ने एक महान गायिका को खो दिया है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में भरथरी गायन की पुरानी परंपरा को सुरुजबाई खांडे ने रोचक लोकशैली में प्रस्तुत कर विशेष पहचान बनाई थी, विश्व में दिलाई भरथरी को पहचान दिलाया भरथरी गायन में हारमोनियम, बांसुरी, तबला, मंजीरा का संगत होता है। देवी अहिल्याबाई पुरुस्कार से सम्मानित सुरुज बाई कई देशों में भरथरी लोक गायन का प्रदर्शन कर चुकी थीं।

उन्हें एसईसीएल में चतुर्थ कर्मचारी वर्ग में नौकरी मिली थी, लेकिन कुछ वर्ष पूर्व मोटरसाइकिल से दुर्घटना होने की वजह से नौकरी कर पाना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने 9 साल पहले ही रिटायरमेंट ले लिया। ज्ञात हो कि भरथरी गायन प्रसिद्ध राजा भर्तहरि के जीवन वृत्त, नीति और उपदेशों को लोक शैली में प्रस्तुति है।

सोवियत रूस सहित विश्व के 18 देशों में भरथरी को विशेष पहचान दिलाई है। बिलासपुर जिले के ग्रामीण और सामान्य परिवार में पैदा हुईं सुरुज बाई खांडे ने महज 7 साल की उम्र में अपने नाना रामसाय धृतलहरे से भरथरी, ढोला-मारू, चंदैनी जैसी लोक कथाओं को सीखना शुरू किया। कुछ ही समय में वह अच्छा गाने लगीं थी। बुलंद आवाज होने की वजह से लगातार मंच मिलने लगे।

2000-01 में सुरुज को देवी अहिल्या बाई सम्मान दिया गया, इसके बाद जब छत्तीसगढ़ राज्य बना तो दाऊ रामचंद्र देशमुख और स्व. देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया। सुरुज बाई ने अब तक जितने भी कार्यक्रम देती थी उनमे पति लखन खांडे के साथ जरुर होते थे, वह भी लोक गायक हैं।

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