भक्ति ही है भवसागर पार करने का मार्ग : राजेंद्र

धनेश्वर साहू

जैजैपुर। जनपद पंचायत जैजैपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत काशी गढ़ में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ महोत्सव की बेला में राजेंद्र महाराज जी कह रहे थे कि भक्ति ही भवसागर पार करने का मार्ग है यहां पर उन्होंने यह भी बताया कि भगवान शंकर को उनके ससुर दक्ष के द्वारा शराफ दिया गया जिसकी वजह से उनकी पूजा नहीं होती है भगवान भोलेनाथ शंकर की पत्नी सती के बारे में उन्होंने कहा की भक्ति में ही शक्ति है।

भगवान भोलेनाथ को उनके ससुर के द्वारा निमंत्रण ना दिए जाने के कारण उन्होंने अपने पति सती को भी मायके ना जाने के लिए कहा लेकिन उनकी पत्नी सती ने भी अपने पति का बात ना मानते हुए अपने पिता के घर गया जहां पर उन्हें भी मान सम्मान का सामना करना पड़ा और अपमान सती हुई क्योंकि उनके मायके में अपने पति के लिए स्थान ना देख कर वह क्रोधित हो गई उन्होंने अग्नि में कुद कर अपने प्राण पखेरू का बलिदान कर दिया।

इनकी जानकारी होने पर भगवान भोलेनाथ हिमालय पर्वत में तांडव नृत्य करते हैं जिनके वजह से पूरा ब्रह्मांड हिल जाता है और वहां पर निमंत्रण के स्थान पर हाहाकार मच जाता है और सभी देवता लोग इधर-उधर भाग जाते हैं ।इस प्रकार से श्रीमद् भागवत महापुराण यज्ञ में महाराज राजेंद्र जी ने कहा की भक्ति होने पर भगवान ही स्वंय आते हैं । भोलेनाथ शंकर हमेशा ही आंख मूंदकर राम नाम का गुणगान करते हैं राम का सबसे भक्ति करने वाला शंकर भगवान ही उसके परम भक्त हैं । इस प्रकार से भक्ति ही इस भवसागर पार करने का सुन्दर मार्ग है।

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