भीमा मंडावी बस्तर क्षेत्र के इकलौते BJP विधायक थे, ऐसा रहा सियासी सफर

दंतेवाड़ा। बस्तर लोकसभा के लिए 11 अप्रैल को मतदान होने जा रहा है। उससे पहले ही यहां से बड़ी खबर सामने आई है। इस इलाके से भाजपा के इकलौते भाजपा विधायक भीमा मंडावी ( BJP MLA Bheema Mandavi) की नक्सली हमले में मौत हो गई है।

नक्सलियों ने हमला उस वक्त किया, जब वो चुनावी सभा को संबोधित कर वापस लौट रहे थे। उसी वक्त इनके काफिले की एंटी लैंडमाइन व्हीकल को आईईडी ब्लास्ट से नक्सलियों ने उड़ा दिया। इस हमले में भाजपा विधायक और विधानसभा में उपनेता भीमा भंडावी की मौत हो गई।

भीमा मंडावी विधानसभा में भाजपा विधायक दल के उपनेता हैं। मंडावी दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। दंतेवाड़ा जिले के गदापाल निवासी मंडावी 2008 में विधायक चुने गए थे। 2013 का विधानसभा चुनाव वो देवती कर्मा से हार गए थे, लेकिन 2018 में पार्टी ने फिर से उन्हें टिकट दिया। इस बार उन्होंने देवती कर्मा को 2071 वोट से मात दी थी। भीमा को कुल 37 हजार 744 वोट मिले थे, जबकि देवती को 35 हजार 673 वोट। 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले भीमा पेशे से कृषक थे। भीमा के परिवार में माता- पिता और पत्नी ओजस्वी मंडावी के अलावा एक पुत्र खिलेंद्र मंडावी है।

बता दें कि भीमा मंडावी बस्तर संभाग से भाजपा की टिकट पर अकेले जीतने वाले थे। इसी कामयाबी के बाद उन्हें इस बार विधानसभा में उपनेता बनाया गया था। उनकी छवि के कट्टर हिंदूवादी नेता के तौर पर रही है। वो लंबे वक्त तक विश्व हिंदू परिषद से भी जुड़े रहे हैं और भाजपा के आदिवासी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी थे।

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