एमपी छात्रसंघ: अब चुनाव के नियमों को लेकर छिड़ा बवाल

मध्य प्रदेश में छात्र संघ चुनावों की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है, छात्रों और कॉलेजों में गर्मागर्मी बढ़ती जा रही है. अब छात्रसंघ चुनाव के नियमों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

दरअसल, उच्च शिक्षा विभाग ने जो नए नियम तय किए हैं, उसके मुताबिक जिन छात्रों पर एफआईआर दर्ज है, यदि उन धाराओं में 5 साल की सज़ा है तो वो चुनाव नहीं लग सकेंगे.

इस नियम को लेकर सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं क्योंकि लोक सभा और विधानसभा चुनाव के नियमों के मुताबिक वो लोग चुनाव नहीं लड़ सकते जिन्हें किसी भी कोर्ट से कम से कम 2 साल की सज़ा हुई हो.

ऐसे में सवाल ये है कि दोनों चुनावों के लिए नियम अलग अलग क्यों है. हैरानी इसलिए भी है क्योंकि विभाग के मंत्री जयभान पवैया के खिलाफ भी गंभीर अपराधों में केस चल रहा है. इतना ही नहीं आरटीआई की जानकारी और एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 के चुनावों में जीते कई विधायकों पर गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज है तो फिर छात्रों के लिए अलग नियम क्यों?

मामले में कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि विभाग के मंत्री पर जब खुद एफआईआर है तो छात्रसंघ चुनावों में इस तरह का नियम क्यों लगाया गया है. कांग्रेस के मुताबिक पार्टी के दो चेहरे हैं. ये वो पार्टी है जिसके सदस्य आईएसआई एजेंट साबित हो चुके हैं.

वहीं बीजेपी का कहना है कि मंत्री जयभान पवैया धर्म की रक्षा कर रहे थे जब उनपर एफआईआर दर्ज हुई. विधायकों और छात्र नेताओं की तुलना करना गलत है क्योंकि जनप्रतिनिधि या विधायक जनता के मुद्दों के लिए कानून तोड़ता है.

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