नए विवाद में फंसे BHU वीसी, यौन उत्पीड़न के दोषी को हॉस्पिटल चीफ बनाने के लिए की पैरवी

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में छात्राओं से छेड़खानी वाला विवाद अभी थमा नहीं था कि यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का नाम एक नए विवाद में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी दो महीने बाद रिटायर होने वाले हैं लेकिन रिटायरमेंट से पहले भी वह विभिन्न डिपार्टमेंट में होने वाली भर्तियों में दखल दे रहे हैं। इसमें एक ऐसे टीचर भी हैं जो कि यौन उत्पीड़न के दोषी पाए जा चुके हैं। उन फैकल्टी को लेने की बात कार्यकारी सदस्यों (ईसी) की मीटिंग में उठी। मीटिंग बुधवार (27 सितंबर) को हुई थी।

विवाद यह है: मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक, जितनी भी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज हैं उनके मुखिया अपनी रिटायरमेंट के दो महीने पहले कोई अपाइंटमेंट नहीं कर सकते। त्रिपाठी 27 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में वह अब दखल नहीं दे सकते।

ईसी यूनिवर्सिटी के सभी बड़े फैसले लेती है। सभी डिपार्टमेंट के लिए सिलेक्शन भी यही बॉडी करती है। वीसी ईसी और सिलेक्शन कमेटी दोनों के मुखिया होते हैं।
ईसी मीटिंग में हुआ विरोध

वीसी ओपी उपाध्याय को सर सुंदरलाल हॉस्पिटल का मेडिकल सुपरिंटेंडेंट बनाना चाहते हैं। लेकिन ईसी के सदस्यों ने इसका यह कहकर विरोध किया कि फिजी के एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में उपाध्याय को यौन उत्पीड़न का दोषी पाया गया था। उपाध्याय फिलहाल एक्टिंग मेडिकल सुपरिंटेंडेंट हैं। अपनी सफाई में उन्होंने इसको जबरन उगाही का मामला बताया। जिसको गलत तरीके से पेश किया गया।

फिलहाल उपाध्याय को परमानेंट नहीं किया गया है। बाकी जिन लोगों के नामों को ईसी के सामने पेश किया गया उनका नाम क्लीयर कर दिया गया है। वीसी ने कहा कि ईसी में नियुक्ति की बात उठना काफी सामान्य सी बात थी।

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