भूपेश बघेल की कांग्रेस भवन में पत्रकारों से चर्चा

आदिवासियों के जल, जंगल जमीन की लूट

रायपुर: पत्थरगड़ी की घटना साधारण नहीं है. ये जनविद्रोह का संकेत है. जिस प्रकार से पत्थरगड़ी का शिलालेख है, उसमें अनुसूची 5 का उल्लेख है. शिलालेख जिसमें उन्होंने किसी शासकीय अधिकारी कर्मचारियों को आने-जाने में रोक लगाया है. इसलिये मुख्यमंत्री का यह कहना कि धार्मिक कार्य हूं, मैं समझता हूं कि आंख मूंदने वाली बात है. जैसे शुतुरमर्ग रेत में सर गड़ा ले और कहे कि तूफान निकल गया है. ये उसी प्रकार की बात है. वहां कभी माओवाद न था, न है.

उसके बाद वहां के आदिवासियों ने इस प्रकार से कार्य क्यों किया है? ये बहुत ही चिंतनीय बात है. आखिर आदिवासियों ने इस प्रकार के कदम क्यों उठाये है? मुख्यमंत्री इसे धार्मिक कार्य कहते है. अनुसूची 5 कोई धार्मिक कार्य नहीं है. अनुसूची 5 सरकार के द्वारा भारत सरकार के संविधान में इसका उल्लेख है. इसके द्वारा आदिवासियों को उनका हक दिया गया है. दूसरी बात ये है कि पेसा कानून और फारेस्ट राईट एक्ट दोनों अधिनियमों का, छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा अपनी कार्पोरेट मित्रों के साथ मिलकर, इन दोनों कानूनो का दोनो अधिनियमों का खुले आम उल्लंघन किया जा रहा है. आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन के अधिकार सब लूटे जा रहे है.

यदि पेसा कानून और फारेस्ट राईट एक्ट दोनो को ठीक ढ़ंग से लागू कर देते तो इस प्रकार की बाते सामने नहीं आती. रायगढ़, सरगुजा, कोरबा हो अपने कार्पोरेट दोस्तो के साथ, अपने ठेकेदार मित्रो के साथ छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को लूटने का काम हो रहा है. जैसे अभी रायगढ़ जिले के तमनार में जनसुनवाई कर रहे थे जबकि वहां अंकसूची पांच लागू है, पेसा कानून लागू है, ग्रामसभा की बैठक न बुलाकर के सीधा जनसुनवाई का हमने विरोध किया और सरकार को जनसुनवाई निरस्त करनी पड़ी. अभी पेण्ड्रा, गोरेला हम लोग गये थे. रेल मार्ग के लिये जमीन ली गयी अभी तक के वहां के आदिवासियों को भुगतान नहीं हुआ है. चाहे जिसके पास पट्टा हो, चाहे जिसके पास वनाधिकार पट्टा हो. सैकड़ो के तादाद में लोग भटक रहे है मुआवजा के लिये और सरकार आंख मूंदे बैठी है.

वहां जो रेल लाईन का ठेकेदार है, कोरबा के भाजपा सांसद का पुत्र है. कांग्रेस का जहां तक के सवाल है, कांग्रेस ने संविधान को लागू किया है. पूरे देश में संविधान कांग्रेस ने लागू किया है. संविधान के विपरीत कोई भी कार्य हो, उसका समर्थक कांग्रेस पार्टी कभी नहीं करेगी. ये जो स्थिति बनी है, 15 साल से रमन सरकार के विकास मॉडल की देन है. रमन सरकार 15 साल से जो विकास का मॉडल चला रही है उसकी देन है. कमीशनखोरी से फुरसत नहीं है, भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुयी है सरकार. कानून के धज्जियां उड़ाई जा रही है. अपने हितो में वे लोग कानून को तोड़मरोड़ रहे है धज्जिया उड़ा रहे है.

यह स्थिति कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के कारण निर्मित है. रमन सिंह इसके दोषी है. रमन सिंह अगर-मगर की भाषा क्यों बात कर रहे है? क्या वहां प्रशासन नाम की चीज नहीं है जो मुख्यमंत्री को जानकारी नही है. प्रदेश को जानकारी देने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री को है और यदि वो अगर-मगर कर रहे है दाये-बाये कर इसका मतलब ये है कि उनके नियंत्रण में कुछ भी नही है. ये जो स्थिति उत्पन्न हुयी, उसके रमन सिंह जिम्मेदार है. संविधान का विपरीत किसी भी कार्य का कांग्रेस पार्टी समर्थन नहीं करेगी. रमन सिंह बताये ये धार्मिक है या संविधान के विपरीत है? रमन सिंह शासन में है. जवाब देने की जिम्मेदारी उनकी है. आज एक सप्ताह हो गया. मीडिया के लोग जा-जा के वहां इंटरव्यू ले रहे है.

इतने सारे मीडिया चैनलो में चल रहा है. कलेक्टर ने क्या रिपोर्ट दिया है? एसपी ने क्या रिपोर्ट दिया है? मुख्यमंत्री ये तो पहले बतायें! हम किसके साथ खड़े है नहीं खड़े है ये बाद की बात है. ये स्थिति क्यों उत्पन्न हुयी पहले रमन सिंह बताये? वहां कोई नक्सलवाद नहीं है, कोई माओवाद नहीं है वहां, और अगर-मगर की बात कर रहे है धार्मिक है या राजनैतिक है कि वो संवैधानिक है वो भी पता नहीं इतना भी होश नहीं मुख्यमंत्री रमन सिंह को? ये कृत्य कैसे धार्मिक हो सकता है? अंकसूची 5 जहां लागू है जहां कोई भी बाहरी व्यक्ति कलेक्टर, एसपी नहीं आ सकता यह धार्मिक कृत्य कैसे हो सकता है?

अंकसूची 5 के व्याख्या स्पष्ट है कि वहां ग्राम सभा ही तय करेगा कि वहां क्या क्या होना है तो ग्राम सभा को विस्तृत अधिकार दिया गया है. पेसा कानून में ग्रामसभाओं को अधिकार दिया गया है. उस अधिकार से आदिवासियों को वंचित किया गया है. सरगुजा में पूरे ढाई साल से 144 धारा लगी हुई है. पूरा सरगुजा सहित बिलासपुर के जितने शासकीय कार्यालय है, उसमें सभी में 15 दिन पहले 144 धारा लगा दी गयी है. यहां तो कुछ भी चल रहा है इस प्रदेश में रमन सिंह को पता है की नही कि ढाई साल से पूरे सरगुजा जिले में 144 धारा लगा हुआ है. बिलासपुर में धारा 144 लगी है. पांच पक्षकार एक साथ नही जा सकते किसी आफिस में. जितने भी शासकीय कार्यालय है उसमें धारा 144 लगी है.

कलेक्ट्रेट में धारा 144 लगाना समझ आता है, जुलूस न ले जाये लेकिन सभी कार्यालयों में लगा दिये है. विकास की चिड़िया खोजने की बात हुई थी. कर्नाटक से तुलना उन्होंने की थी तो रमन सिंह विकास खोजने कब चलेगें, ये बताये. गाड़ी ले के मैं आऊंगा और चलते है दोनों सड़क मार्ग से. जहां कहे अपने निर्वाचन क्षेत्र में, जिस को गोद लिया है उस गांव में चले, उसके पुत्र सांसद पुत्र ने गोद लिया उस गांव में चले, जहां कहां बिलासपुर चलें, कवर्धा चलना है वहां चले. रमन सिंह पत्थरगड़ी के बारे में अपने जिम्मेदारी से भाग रहे है. यह धार्मिक है या राजनैतिक है, हमसे समझने के पहले क्या है ये वो पहले स्पष्ट करे. ये उनके कार्यक्षेत्र के दायरे में आता है.

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