भूपेश सरकार तथा समाज प्रमुख शराबबंदी के नाम पर सिर्फ तमाशा कर रहे है इसीलिये समाज और छत्तीसगढ़ की दुर्दशा होती जा रही है- हुलास साहू

सरकार और समाज प्रमुखों से छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी की उम्मीद ही करना बेकार है तो आओं छत्तीसगढ़ वासियो चले ग्रामसभा की ओर- धर्मेन्द्र बैरागी

रायपुर : छत्तीसगढ़ ग्राम विकास संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष हुलास साहू ने कहा कि राज्य के भूपेश सरकार अपने घोषणा-पत्र में शराबबंदी वादे के साथ सत्ता में आई। परन्तु सरकार ने शराबबंदी की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नही उठा पाई, राज्य के भूपेश सरकार 2019 में शराबबंदी के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश दिए थे लेकिन पहली बार शराबबंदी पर समाज प्रमुखों के साथ बैठक हुई,

परन्तु देखने ये आ रहा है कि सरकार, अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के समाज प्रमुखों की पूर्ण शराबबंदी करने की मंशा और इस पर गंभीरता इसी बात से पता चल रहा है। कि बैठक में 21 समाजिक संगठनों के अध्यक्ष और पदाधिकारी शामिल हुए परन्तु एक राय नही बनी।

लेकिन सर्वसम्मति से एक निष्कर्ष निकाला गया कि शराबबंदी एकाएक सम्भव नही है यह कहकर किसे धोखा देना चाहते है उसी जनता ने अपने-अपने के समाज प्रमुख बनाकर बैठाया है। इन समाज प्रमुखों बताना चाहता हूँ कि कोरोना काल मे करीब 4माह की पुरे लॉकडाउन थे तो शराब के बिना कोई नुकसान नही हुई बल्कि छत्तीसगढ़ के जनता दाई, दीदी, भाई-बहिन और बेटी सुरक्षित महसूस कर रहे थे। शराब के कारण महासमुंद की दर्दनाक घटना से हम सबको सबक लेने की जरूरत है।

समाज प्रमुख का कहना

बैठक में समिति के समाज प्रमुख का कहना है कि शराबबंदी के लिए ग्रामसभा को अधिकार दिया जाये पर इन्हें ये भी पता ही नहीं कि ग्रामसभा को ये अधिकार पहले से प्राप्त है। पर इन बुद्धिजीवी को मालूम होना चाहिए कि न ही लोकसभा, न ही विधानसभा सबसे बड़ी ग्रामसभा है। जिसका उपयोग करके कई जगह पंचायत स्तर में शराबबंदी किया गया है। अगर छत्तीसगढ़ के आधी आबादी ग्रामसभा मे जनहित में प्रस्ताव पारित करता है तो उस पर विधानमंडल को तुरंत कानून बनाना पड़ेगा। यह पंचायती राज व्यवस्था कानून में कहता है।

सरकार के नुमाइंदे कहता कि राजस्व का नुकसान होगा बल्कि इन नेताओ, अधिकारियों और समाज प्रमुखों की कमीशन का नुकसान होने डर बना हुआ है। हम सबको समझना होगा कि इनके मंशा क्या है राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक तीन समिति समय बिताने के अलावा कुछ करने वाला नही है तथा छत्तीसगढ़ के जनता को गुमराह करती नजर आ रही है।

सरकार बनने के पौने 3 साल बाद भी छत्तीसगढ़ में शराबबंदी नही होना भूपेश सरकार तथा विपक्ष के साथ-साथ सभी समाज प्रमुख भी जिम्मेदार है। तथा समाज प्रमुखों को छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी करने के लिए सरकार के खिलाफ शराबबंदी मुहिम तेज करने के बजाय अब तो ऐसा लगने लगा है कि समाज प्रमुख भी सरकार और अधिकारी के साथ मिलकर शराबबंदी के नाम पर सिर्फ तमाशा कर रहे है।

छत्तीसगढ़ ग्राम विकास संघर्ष समिति

छत्तीसगढ़ ग्राम विकास संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव धर्मेन्द्र बैरागी ने कहा कि सरकार 2019 में राजनीतिक, समाजिक और प्रशासनिक तीन समिति गठन कर तथा अन्य राज्यों जहां शराबबंदी लागू है वहां का अध्ययन करने की बात दो वर्षों में जहां के तहाँ ही है। लेकिन छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर पहली बार हुई बैठक में समाज प्रमुखों की बीच नही बनी सहमति और अभी भी तय नहीं कि क्या करना है।

मतलब सरकार की मंशा बात को टालमटोल करने की साफ-साफ नजर आ रही है। साथ ही गठित तीन समिति तीन तिखार महाविचार कर समय निकाल रहे हैं। सरकार और समाज प्रमुखों से छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी की उम्मीद ही करना बेकार है तो आओं छत्तीसगढ़ वासियों चले ग्रामसभा की ओर।

ऐसे में छत्तीसगढ़ के हर ग्राम वासियों को ही पहल करना चाहिए तथा अपने ग्राम पंचायत समिति को पूर्ण शराबबंदी के लिए विशेष ग्रामसभा की बैठक करवाने हेतु आवेदन सौपे और ग्रामसभा में जोर शोर से पहुँचकर पूर्ण शराबबंदी की प्रस्ताव पास कराये। चुने हुए जनप्रतिनिधियों को प्रस्ताव कापी सौपना होगा और साथ ही ग्रामसभा से प्रस्ताव करे ताकि सरकार मजबूर हो जाए पूर्ण शराबबंदी कानून बनाने और लागू करने के लिए।

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