कोरोना की संभावित तीसरी लहर से लडऩे के लिए भूपेश सरकार तैयार

अभिभावकों की वजह से चपेट में आ सकते हैं बच्चे

रायपुर। भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर कहर बरपा रही है और अब तक हजारों की तादाद में लोग मारे गए हैं। भारत में अब कोरोना वायरस की एक और खतरनाक लहर का खतरा मंडरा रहा है। कहा जा रहा है कि इस नई लहर में सबसे ज्‍यादा शिकार बच्‍चे हो सकते हैं।

इस बीच तीसरी लहर को रोकने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग के साथ बच्चों के निजी अस्पताल भी तेज़ी से काम कर रही है। सरकार इसके लिए गाइडलाइन बना रही है। बच्चों के निजी अस्पताल संचालको के साथ बैठकें कर रही है। और सरकारी स्तर पर और निजी स्तर पर सुविधाओं को बढ़ाने का काम किया जा रहा है।

सरकारी स्तर पर ऑक्सीजन बेड की पूरी व्यस्था की जा रही है। शहर के हर सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों के लिए वेंटिलेटर और नए आईसीयू का भी इंतजाम किया जा रहा है। वही निजी स्तर पर कई बच्चों के अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट भी लगाया गया है।

क्या तीसरी लहर खतरनाक होगी?

कोरोना महामारी की तीसरी लहर के दूसरे से भी अधिक तेज यानी खतरनाक हो सकता है ऐसा डॉक्टरों का अनुमान है क्योंकि ये लहर बच्चों में जल्दी असर करेगा इस लिए कोरोना की तीसरी लहर खतरनाक साबित हो सकती है। हालांकि, यह ऐसा कुछ नहीं है जिसकी भविष्यवाणी की जा सकती हो। आमतौर पर, यह उम्मीद की जाती है कि हर ताजा लहर पिछली लहर की तुलना में कमजोर होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि वायरस, जब उभरता है तो अपेक्षाकृत मुक्त रूप से फैलता है।

अभिभावकों की वजह से चपेट में आ सकते हैं बच्चे

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे अपने माता-पिता या परिजनों की वजह से संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। अभी तक ऐसे तमाम मामले सामने आए है, जिनमें वही बच्चे संक्रमित हो रहे है, जिनके अभिभावक महामारी की चपेट में आ चुके थे। कोरोना ऐसी बीमारी है, जिसमें कब किसे क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। डॉक्टरों का मानना है कि कोरोना की तीसरी लहर सिर्फ विचाराधीन है। कोरोना की तीसरी लहर अभी तक रायपुर शहर में आया नहीं है लेकिन इससे लडऩे के लिए अस्पतालों को तैयारी अभी से करना ही होगा। लेकिन हाल ही में दोबारा उठाए गए आंशिक छूट और लॉकडाउन जैसे कदमों के बाद अब रायपुर में स्थिति थोड़ी बदलने लगी है।

बच्चों के लिए नए आईसीयू

कोरोना के संभावित तीसरीे लहर को देखते हुए राज्य सरकार ने अभी से अपनी कमर कस ली है। और रायपुर शहर व पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में तीसरीे लहर से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए है। स्वास्थ्य विभाग की सीएमओ मीरा बघेल ने बताया कि सरकारी और निजी बच्चों के अस्पतालों में नए और आधुनिक आईसीयू बनाए गए है। जिससे कोरोना के तीसरे लहर से लडऩे में बच्चों को ज्यादा तकलीफों का सामना ना करना पड़े। जानकारी देते हुए मीरा बघेल ने बताया कि इस लहर से लडऩे के लिए सरकार ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। जिससे कि ये कहा जा सकता है कि कोई भी बच्चा अगर इस लहर की चपेट में आ भी जाए तो उसे पूरी तरह से अच्छा इलाज मिलेगा।

बच्चों के लिए मंगाए जा रहे ऑक्सीजन मास्क

बच्चों के लिए आईसीयू बनाने के बाद सरकार ने उनके लिए छोटे-छोटे ऑक्सीजन मास्क भी मंगवाए है जिससे बच्चों को सांस लेने में ज्यादा तकलीफ ना हो सके। कोरोना में बच्चों के लिए भी ऑक्सीजन मास्क मंगाया जा रहा है। सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है कि कोरोना में बच्चों के लिए जो सही होगा वही इलाज उन्हें दिया जयेगा। छोटे बच्चों में अगर कोरोना के कोई लक्षण दिखते भी है तो उन्हें किसी भी अस्पताल में भर्ती नहीं कर सकते क्योंकि उनके लिए अच्छे और बड़े अस्पताल बने हुए है। बच्चों में तीसरी लहर ना आए उसके लिए भी बच्चों को हाथ धोने और सेनेटाइजर लगाने के लिए उनके परिजनों द्वारा बताया जाए जिससे उनके बच्चों में कोरोना के कोई भी लक्षण ना दिखे।

बच्चों के लिए नर्सों को भी कर रहे तैयार

कोविड-19 प्रोटोकॉल में बच्चों के लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी किए गए है। कोरोना के तीसरी लहर से लडऩे के लिए बच्चों की देख-रेख करने व उनकी सेवा करने के लिए अभी मेडिकल कालेज व अन्य स्वास्थ्य विभाग सम्बंधित नर्सों को तैयार किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के बिना लक्षण वाले बच्चों के लिए किसी तरह के इलाज का सुझाव नहीं दिया जाएगा। बच्चों में संभावित लक्षणों पर नजर रखने के लिए डॉक्टर्स भी अपनी तैयारियां कर रहे है। निजी अस्पतालों के डॉक्टर अपनी-अपनी नर्सों को अभी ट्रेनिंग देने में लग गए है।

वेंटिलेटर की भी पूरी व्यवस्था

कोरोना के तीसरी लहर से बचने और बच्चों को बचाने के लिए सरकार ने वेंटिलेटर भी मंगवा लिए है। अस्तपाल में भी अगली लहर के मद्देनजर बच्चों के लिए वेंटिलेटर बेड की संख्या 15 से बढ़ाकर 21 कर दी है। बच्चों के हॉस्पिटल के मेडिकल स्टाफ को भी बढ़ाया जा रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञों की टीम गठित की जा रही है। बच्चों में संक्रमण की शिकायत दिखने पर टेस्टिंग का काम किया जाएगा। सरकारी अधिकारी ने बताया कि अब पहले के मुकाबले ज्यादा बच्चों की कोविड जांच की जा रही है। पिछले वर्ष 10 साल से कम उम्र के बच्चों की आम तौर पर जांच नहीं हो रही थी। लेकिन इस तीसरी लहर की संभावना इतनी बढ़ गई है कि 10 से कम उम्र वाले बच्चों के भी जांच किया जा सकते है।

बच्चों को आसानी से मिलेगा बेड

कोरोना के दोनों लहार को देखते हुए जहां मरीजों को अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ऐसे हालात में हजारों कोरोना मरीज अपने घरों पर ऑक्सीजन सिलेंडरों से किसी तरह सांस लेने को मजबूर थे। डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना मरीजों की हालत इतनी तेजी से बदलती या गिरती है कि उन्हें अस्पतालों में ही ऑक्सीजन जैसी क्रिटिकल केयर दी जानी चाहिए थी। मगर मौजूदा हालात में अगर घरों पर ऑक्सीजन लेनी भी पड़े तो उस पर डॉक्टरों की पूरी निगरानी थी। लेकिन बच्चों के लिए ऐसा कुछ नहीं करना होगा बच्चों को अस्पताल में ही सभी सेवाएं दे दी जाएगी। बच्चों के बेड भी कम नहीं होंगे। कम हुए भी तो सरकार ने पहले से ही बहुत से बेड मंगवा लिए है।

तीसरी लहर से लडऩे के लिए भूपेश सरकार तैयार

कोरोना महामारी के तीसरी लहर को देखते हुए भूपेश सरकार ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। स्वास्थ्य विभाग की सीएमओं मीरा बघेल ने बताया कि कोरोना के पहले और दूसरे लहर से बचने के लिए पर्याप्त समय था। लेकिन उसके बाद भी सरकार से जो बना सरकार ने उस हद तक जाकर लोगों को कोरोना से बचाने का प्रयास किया है। कोरोना के अब संभावित तीसरी लहर को देखते हुए भूपेश सरकार ने बच्चों के वेंटिलेटर, ऑक्सीजन बेड, बच्चों के लिए नए ऑक्सीजन मास्क और निजी व सरकारी अस्पतालों की नर्सेस को तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार से देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को एक सीख लेनी चाहिए कि किस तरह से तीसरीे लहर के आने से पूर्व ही उससे बचने के लिए अपने राज्य को तैयार किया जाए।

कोरोना के तीसरी लहर से लडऩे के लिए हम पूरे तरीके से तैयार हैं। एकता अस्पताल ने एक्सट्रा ऑक्सीजन बेड और ऑक्सीजन प्लांट की तैयारी पहले से कर लिया है।

-डॉ. अनीस मेमन, शिशु रोग विषेशज्ञ

कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पूरी हो चुकी है और कोरोना के तीसरे लहर से लडऩे के लिए छत्तीसगढ़ सरकार अब तैयार है।

-डॉ. मीरा बघेल (सीएमओ रायपुर)

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