Big breaking: कलमी डीपा पारा रहवासियों के मकानों में चला बुलडोजर

जिंदल इस्पात, प्रशासन और मोहल्ले वासियों के बीच तनातनी

ऋषिकेश मुखर्जी

रायगढ़।

कलमी गांव में निवास रात 62 परिवारों के समय के ऊपर उस समय मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा जिस समय राजस्व विभाग एवं पुलिस की संयुक्त टीम कलमी गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची। दो जेसीबी व महिला पुलिस बल सहित नायब तहसीलदार ने आज ग्राम वासियों को दी गई समय अवधि समाप्त होने के पश्चात तोड़फोड़ की कारवाही करने पहुंचे प्रशासन द्वारा चा 4 जनवरी तक का समय ग्राम वासियों को दिया गया था और उन्हें सख्त निर्देशित किया गया था कि वह 4 जनवरी तक अपने सामानों सहित मकान खाली कर दें। परंतु समय अवधि समाप्त होने के पश्चात भी जब ग्रामीणों ने जगह खाली नहीं की।

आज जिला प्रशासन की टीम कलमी गांव पहुंची जहां जेसीबी से अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया गया, जिस वक्त जेसीबी से तोड़फोड़ शुरू किया गया उस वक्त गांव के सभी लोग जिला कलेक्टर से मिलने रायगढ़ जिला मुख्यालय आए हुए थे जहां पर वह अपनी फरियाद कलेक्टर यशवंत कुमार से करना चाहते थे।

परंतु जैसे ही उन्हें खबर लगी कि उनकी गैर हाजरी में गांव में जिला प्रशासन की टीम पहुंची है और जेसीबी से तोड़फोड़ शुरू की जा रही है ग्रामीण घबराते हुए गांव पहुंचे, अपनी अनुपस्थिति में घर को टूटता देख ग्रामीणों में आक्रोश फूट पड़ा सभी महिलाएं जेसीबी के सामने खड़ी हो गई और तोड़फोड़ का पुरजोर विरोध करने लगी, माहौल गर्माता देख नायब तहसीलदार ने जेसीबी बंद करवा दी।

मौके पर तत्काल कोतरा रोड थाना प्रभारी रूपक शर्मा पहुंचे जहां पर उन्होंने ग्राम वासियों को समझाइश दी और उन्हें कानून हाथ में नहीं लेने की सलाह दी थाना प्रभारी की समझाइश काम आई और ग्रामवासियों ने आंदोलन शांत करते हुए इस बात का अनुरोध किया कि उन्हें एक मौका दिया जाए ताकि वह आला अधिकारियों से चर्चा कर सकें इस बात का सकारात्मक नतीजा निकला और कल मंगलवार को जिला प्रशासन और प्रभावित सभी परिवार के लोगों के बीच वार्तालाप होना तय हुआ।

इस बीच दो से तीन मकान तोड़े जा चुके थे। जिससे गांव वासी काफी दुखी और आक्रोशित हैं उनका आरोप है कि गांव के सरपंच द्वारा पूर्व नियोजित तरीके से उन्हें कलेक्टर से मिलने रायगढ़ भेजा गया और उनकी गैरमौजूदगी में उनके घर पर तोड़फोड़ की गई,जिन लोगों के घर पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं उनके सामने अब रहने की समस्या आन पड़ी है ऐसी स्थिति में वह परिवार बेघर हो चुका है ना तो खाने के लिए कि कुछ बचा न हीं पहनने के कपड़े यहां तक कि बच्चों की दवाइयां भी मलबे में दब गई अपनी पीड़ा बताते हुए वह लोग जिला प्रशासन से इस बात का निवेदन कर रहे हैं कि उन्हें उनके टूटे हुए घर का मुआवजा और नुकसान हुए सामान की भरपाई की जाए।

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