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बड़ी खबर :बिहार में 40 वर्षों से होता रहा जमीन घोटाला ,किसी सरकार ने नहीं लीं सुध!

हमाम में सब नंगे है

पटना

हमाम में सब नंगे है ‘ यह कहावत बिहार के सत्ता और सियासत के लिए बिल्कुल फीट हैं । यह कोई काल्पनिक आरोप नहीं बल्कि तमाम सबूत और साक्ष्य यहीं कहं रहा है की सूबे में 40 वर्षों से राजधानी के नाक के नीचे ,जहां सरकार के हुक्मरान बैठते हैं जमीन घोटाला होता रहा और किसी ने सुध तक नहीं ली।

आश्चर्यचकित करने वाली बात तो यह हैं की सहकारीता विभाग के मिलीभगत से कॉपरेटिव के आर में भू-माफियाओं का बड़ा रैकेट के झांसे और धोखाधड़ी का शिकार सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि आईएएस -आईपीएस ,जजेज बिहार प्रशासनिक सेवा ,बिहार पुलिस सेवा ,जन प्रतिनिधि तक हुये हैं ।

दर्जनों कॉपरेटिव ने फर्जीवाड़ा कर 200-300 करोड़ की सरकारी जमीन बेच दिया और स्वामित्व वाले बिहार राज्य आवास बोर्ड को भनक तक नहीं लगी ।

सरकारी भूमि का बिना जांच सहकारीता विभाग ने दे दिया कॉपरेटिव को रजिस्ट्रेशन

दीघा-राजीवनगर में 1024 एकड़ भूखंड का सन् 1973-74 में अधिग्रहण कर सरकार ने बिहार राज्य आवास बोर्ड के हवाले कर दिया । बिहार सरकार ने अधिग्रहण का गजट 25 जुलाई 1974 को प्रकाशित किया । इसके बाद अधिग्रहण 1024 एकड़ का स्वामित्व बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिन हो गया ।

इसका खुलासा बिहार राज्य आवास बोर्ड के तत्कालीन प्रधान सचिव के ज्ञापांक -4189/ दिनांक 11-10- 2019 ,बिहार राज्य आवास बोर्ड के तत्कालीन सचिव का पत्रांक- लो.शि. 203/2019 -175 दिनांक 10 -01-2020 एवं कार्यपालक अभियंता का पत्रांक -15 दिनांक -11-05-20 के द्वारा स्पष्ट किया हैं की उक्त अधिग्रहण 1024 एकड़ का स्वामित्व बिहार राज्य आवास बोर्ड की हैं ।

सरकार ने उक्त अधिग्रहण भूमि को किसी अन्य द्वारा निबंधन करने पर पूर्व से रोक लगा रखी हैं ।

सहकारी गृह निर्माण समिति

फर्जीवाड़ा का खेल ,इस तरह कालाकारी से किया गया है की आम लोगों को पकड़ पाना आसान नहीं हैं । राजीवनगर-दीघा में अधिग्रहण भूखंड को रैयतीदार ( जो सरकार से मुआवजा ले लिए ) के वंशज से सन् 1978 -2000 लोग निजी जमीन का उल्लेख करते हुये रजिस्ट्री करा लिया ।

कुछ लोग तो फर्जी कागजात भी तैयार कर लिये । अधिग्रहण जमीन को अपना निजी जमीन बताकर कॉपरेटिव ( सहकारी गृह निर्माण समिति ) को रजिस्ट्रेशन के लिए सहकारीता विभाग में अर्जी दाखिल किया । सहकारीता विभाग के अधिकारियों /पदाधिकारियों ने बिना भौतिक स्थल जांच किये ही रजिस्ट्रेशन संख्या जारी कर दिया ।

रजिस्ट्रेशन के पूर्व सहकारीता विभाग ने बिहार राज्य आवास बोर्ड या पटना अंचल कार्यालय ,जिला भू-अर्जन कार्यालय से कोई अनापत्ती प्रमाण -पत्र लेना उचित नहीं समझा। सहकारीता विभाग से रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद दर्जनों कॉपरेटिव, पूर्व के अधिग्रहण बिहार राज्य आवास बोर्ड के स्वामित्व वाले भूखंड पर दावा पेश करने लगे ।

रजिस्ट्रेशन बाद कॉपरेटिव प्रतिवर्ष कैपिटल में सरकार की अधिग्रहण भूखंड को अपना बता ऑडिट रिपोर्ट सहकारीता विभाग में दाखिल करते आ रहे हैं । यहीं वह झांसा है ,जिसके लोग शिकार हुये और यह सहकारीता विभाग के मिलीभगत बिना संभव नहीं हैं ।

200-300 करोड़ का घोटाला ,पुरी प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा

पटना सदर के दीघा मौजा का सरकारी रेट करीब 27 लाख रूपये आवासीय ,व्यवसायीक का ज्यादा हैं ।बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिग्रहण 1024 एकड़ में से करीब 200-300 एकड़ जमीन दर्जनों कॉपरेटिव ( सरकारी गृह निर्माण समिति ) ने मेंबर बनाकर आवंटित कर दिया । जिसका कीमत करीब 200 -300 करोड़ रूपये हैं ।

जबकि किसी को आवंटित करने के पूर्व बिहार राज्य आवास बोर्ड से न तो अनापत्ती प्रमाण -पत्र लिया गया और न ही इसकी सूचना दी गयी । कई कॉपरेटिव तो करोड़ों रूपये समेट लेने के बाद रफ्फू-चक्कर हो गये ।

राजीवनर -दीघा में अधिग्रहण की गयी भूखंड पर दावा और आवंटित करनेवाले कॉपरेटिव में जय प्रकाश कॉपरेटिव ( पूर्व संचालक पीपी वर्मा जेल में ) ,निराला कॉपरेटिव( पूर्व संचालक सत्यनारायण सिंह जेल में ) बजरंग कॉपरेटिव, राजीव कॉपरेटिव, फ्रेंडस कालोनी कॉपरेटिव, पिपुल्स वेलफेयर कॉपरेटिव ,त्रीमूर्ति सहकारी गृह निर्माण समिति (कॉपरेटिव ) ,मगध कॉपरेटिव, कपुरचंद कॉपपेटिव, गोरखनाथ सहकारी निर्माण समिति , बिहार स्टेट हाउसिंग कॉपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड शामिल हैं ।

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