बिहार: महागठबंधन में संकट, अच्छी डील न होने से कांग्रेस नेता नाराज

पटना। बिहार में विपक्षी पार्टियों के महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। चुनाव से पहले कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पार्टी को मिली सीटों को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को बेहद कम सीटें दी गई हैं।

उन्होंने पार्टी हाईकमान से गुहार लगाई है कि वह जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करें, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। पूर्व क्रिकेटर और हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति आजाद ने कहा कि वह पार्टी नेतृत्व से निवेदन करते हैं कि वह इस बारे में जल्द ही कोई निर्णायक फैसला ले।

दरभंगा के सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, ‘यह कैंडिडेट के नजरिए से ही नहीं बल्कि पूरी पार्टी के लिए पूरी तरह हतोत्साहित करने वाला है। किसी नेता को सिटिंग सीट पर लड़ने नहीं दिया जा रहा है। मैं कांग्रेस नेतृत्व से निवेदन करूंगा कि वह इस बारे में निर्णायक फैसला ले।’

दरअसल कीर्ति आजाद की सीट महागठबंधन में आरजेडी के पाले में गई है। बीजेपी के टिकट पर इस सीट से चुनकर आए कीर्ति आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में पार्टी जॉइन की थी। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद मैथिल ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इस समुदाय को परंपरागत रूप से कांग्रेस का वोटबैंक माना जाता है, लेकिन कुछ समय से इसका झुकाव बीजेपी की तरफ रहा है।

2014 के चुनाव में आरजेडी बेहद कम अंतर से यह सीट हारी थी, आरजेडी ने इस बार सीनियर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी को मैदान में उतारा गया है। दरभंगा सीट पर मुस्लिम जनसंख्या सीट भी काफी है। ऐसे में आरजेडी इस सीट पर मजबूती से दावेदारी कर रही थी।

महागठबंधन के सीट शेयरिंग फॉर्म्युले के मुताबिक, आरजेडी 20 सीट से कैंडिडेट उतारेगी, कांग्रेस 9, हिंदुस्तानी आवामी लीग 3, राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी 5, विकासशील इंसान पार्टी 3 सीट दी गई है।

आजाद के सुर में सुर मिलाते हुए सुपौल से सांसद रंजीत रंजन ने कहा, ‘मजबूती से यह संदेश जाना चाहिए कि हमें हल्के में न लिया जाए। मैं पार्टी नेतृत्व से निवेदन करूंगा कि वह जल्द ही इस संबंध में कोई फैसला लें ताकि पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल को कम होने से रोका जा सके।’

रंजीत रंजन पप्पू यादव की पत्नी हैं। पप्पू यादव ने 2014 में आरजेडी उम्मीदवार के तौर पर मधेपुरा सीट जीती थी, लेकिन एक साल बाद लालू ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद पप्पू ने जनअधिकार पार्टी बनाई। पप्पू यादव की कोशिश है कि उनकी पार्टी महागठबंधन का हिस्सा बने। वह कई मौकों पर कांग्रेस और आरजेडी की तारीफ कर चुके हैं।

आरजेडी ने ऐलान किया है कि वह सीनियर नेता शरद यादव को मधेपुरा से मैदान में उतारेगी। 2014 में पप्पू यादव ने उन्हें हरा दिया थ। शरद यादव उस समय जेडीयू उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े थे।

इसके बाद पप्पू यादव ने कहा था कि तेजस्वी यादव उनके और कन्हैया कुमार जैसे लोगों से डरे हुए हैं। पप्पू यादव ने कन्हैया कुमार की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्हें कन्हैया में काफी संभावनाएं दिखाई देती हैं। कन्हैया कुमार बेगूसराय से बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले हैं। वह सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।

टल गया शत्रु का पार्टी में शामिल होना

शत्रुघ्न सिन्हा की कांग्रेस में औपचारिक रूप से शामिल होने की बात एक बार फिर गुरुवार को टल गई। सूत्रों के अनुसार, उनका शामिल होना तय था और इसके लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुला ली गई थी, लेकिन महागठबंधन के बीच सबकुछ तय नहीं होने के कारण इसे टाल दिया गया। हालांकि बाद में शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा बाकी कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात की और पार्टी की ओर से इसकी जानकारी भी दी गई। वहीं शत्रुघ्न सिन्हा ने यह भी साफ कर दिया कि पार्टी कोई भी हो, वह पटना साहिब से ही चुनाव लड़ेंगे। वहां बीजेपी ने पहले ही केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का टिकट घोषित कर दिया है।

तेजप्रताप फिर बगावती तेवर में

उधर लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव एक बार फिर बगावती तेवर में आ गए हैं। पार्टी में उपेक्षा से नाराज तेजप्रताप यादव ने गुरुवार को राज्य की दो सीट-जहानाबाद और शिवहर से अपनी पसंद के उम्मीदवार को टिकट देने की मांग की थी। हालांकि बाद में उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘छात्र राष्ट्रीय जनता दल के संरक्षक के पद से मैं इस्तीफा दे रहा हूं। नादान हैं वो लोग जो मुझे नादान समझते हैं। कौन कितना पानी में है सबकी है खबर मुझे।’ आरजेडी सूत्रों का कहना है कि तेजप्रताप यादव को मनाने की कोशिश जारी है।

Back to top button