बिहारराज्य

भारत में पहली बार: बाढ़ से बर्बाद हुए किसानों को फसल बीमा देने के लिए उपग्रह डाटा का इस्तेमाल शुरू

नई दिल्ली: बाढ़ग्रस्त बिहार में अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्लूएमआई) ने सूचकांक आधारित बाढ़ बीमा (आईबीएफआई) के साथ बाढ़ प्रभावित किसानों की मदद करने की अपने तरह की पहली शुरुआत की है.

यह उपग्रह डेटा के साथ उन्नत मॉडलिंग तकनीक का उपयोग कर प्रभावित लोगों को त्वरित बीमा भुगतान करने में सक्षम बनाता है. कोलंबो स्थित आईडब्ल्यूएमआई के भारतीय प्रतिनिधि आलोक के.

सिक्का ने कहा, “हम मुजफ्फरपुर के कुछ गांवों में आईबीएफआई के साथ बाढ़ से प्रभावित किसानों की मदद करने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसा बिहार में ही नहीं बल्कि देश में पहली बार हो रहा है.

उपग्रह डेटा का प्रयोग कर बाढ़ग्रस्त किसानों को बीमा प्रदान करना इससे पहले कभी नहीं किया गया.” सिक्का ने कहा कि गायघाट ब्लॉक के गांवों में 200 से अधिक खेती करने वाले परिवारों को इस आईबीएफआई योजना के तहत जुलाई में एक पायलट अभियान के लिए चुना गया था.

इन किसानों में ज्यादातर सीमांत किसान हैं जिनकी अक्टूबर के अंत या नवंबर के शुरू में बाढ़ के कारण फसल खराब हो गई थी, वह बीमा धन प्राप्त कर सकते हैं.

नई दिल्ली: बाढ़ग्रस्त बिहार में अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्लूएमआई) ने सूचकांक आधारित बाढ़ बीमा (आईबीएफआई) के साथ बाढ़ प्रभावित किसानों की मदद करने की अपने तरह की पहली शुरुआत की है.

यह उपग्रह डेटा के साथ उन्नत मॉडलिंग तकनीक का उपयोग कर प्रभावित लोगों को त्वरित बीमा भुगतान करने में सक्षम बनाता है. कोलंबो स्थित आईडब्ल्यूएमआई के भारतीय प्रतिनिधि आलोक के.

सिक्का ने कहा, “हम मुजफ्फरपुर के कुछ गांवों में आईबीएफआई के साथ बाढ़ से प्रभावित किसानों की मदद करने का प्रयास कर रहे हैं.

ऐसा बिहार में ही नहीं बल्कि देश में पहली बार हो रहा है. उपग्रह डेटा का प्रयोग कर बाढ़ग्रस्त किसानों को बीमा प्रदान करना इससे पहले कभी नहीं किया गया.”

सिक्का ने कहा कि गायघाट ब्लॉक के गांवों में 200 से अधिक खेती करने वाले परिवारों को इस आईबीएफआई योजना के तहत जुलाई में एक पायलट अभियान के लिए चुना गया था.

इन किसानों में ज्यादातर सीमांत किसान हैं जिनकी अक्टूबर के अंत या नवंबर के शुरू में बाढ़ के कारण फसल खराब हो गई थी, वह बीमा धन प्राप्त कर सकते हैं.

आईडब्ल्यूएमआई के कम्युनिकेशन एंड नॉलेज मैनेजमेंट के वरिष्ठ प्रबंधक नाथन रसेल ने कहा, ‘हमने इस पायलट परियोजना के लिए बिहार का चयन किया है क्योंकि यह देश का सबसे बाढ़ग्रस्त राज्य है जहां हर साल कृषि को भारी नुकसान पहुंचता है.

भारत भर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए आईबीएफआई एक आदर्श मॉडल है.’ वहीं बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, इस साल पिछले दो दशकों में सबसे खतरनाक बाढ़ का सामना करना पड़ा क्योंकि 19 जिलों के 187 ब्लॉक के 2371 पंचायतों में 1.716 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं.

इसके साथ ही बाढ़ से 514 लोग मारे गए. बाढ़ के कारण भारी क्षति को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र से मुआवजे के रूप में 7,637 करोड़ रुपये की मांग की है.

अगस्त में सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी.

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