बीजापुर : जिले में ढ़ाई वर्षों के दौरान 2179 हितग्राहियों को मिला वनाधिकार पट्टा

भूमि समतलीकरण एवं मेड़ बंधान की सहायता से खेती-किसानी को मिला बढ़ावा...डबरी निर्माण के जरिये हितग्राही कर रहे हैं मछलीपालन एवं साग-सब्जी उत्पादन

बीजापुर 28 जुलाई 2021 : राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों के जल, जंगल एवं जमीन के अधिकार को सुरक्षित रखकर उनके जीवन स्तर को ऊंचा करने की कटिबद्धता के फलस्वरुप जिले में बीते ढ़ाई वर्षों के दौरान 2179 हितग्राहियों को वनाधिकार पट्टे प्रदाय किया गया है।

यही नहीं जिले में अब तक कुल 9617 हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया गया है। इन हितग्राहियों को वनाधिकार पट्टे प्रदाय सहित भूमि समतलीकरण एवं मेड़ बंधान के लिए सहायता प्रदान करने के फलस्वरुप खेती-किसानी को बढ़ावा मिला है। वहीं डबरी निर्माण के जरिये हितग्राही मछलीपालन एवं साग-सब्जी उत्पादन कर आय संवृद्धि कर रहे हैं। ज्ञातव्य है कि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत् 13 दिसम्बर 2005 के पूर्व वन भूमि में काबिज हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र प्रदाय किया जा रहा है।

सर्वोच्च प्राथमिकता वनवासियों के अधिकारों की रक्षा 

प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सर्वोच्च प्राथमिकता वनवासियों के अधिकारों की रक्षा एवं वनों का प्रबंधन स्थानीय समुदाय को सौंपने का है। मुख्यमंत्री बघेल की इसी मंशा के अनुरुप जिले में वनाधिकार मान्यता पत्रों के प्रदाय में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त हुई है। जिले में कुल 9617 व्यक्तिगत वनाधिकार मान्यता पत्रों में 13062 हेक्टेयर वन भूमि का अधिकार प्रदान किया गया है। जिससे प्रति परिवार को औसत 1.35 हेक्टेयर वन भूमि का अधिकार प्राप्त हुआ है। व्यक्तिगत वनाधिकार में कृषि भूमि, बाड़ी, आवासीय सुविधा एवं जीवन-यापन को उन्नत करने हेतु अन्य प्रयोजन की भूमि सम्मिलित है।

राज्य सरकार की मंशानुसार जिले में अब तक 2243 सामुदायिक वनाधिकार पत्रों का वितरण किया गया है। जिसके तहत् 62518 हेक्टेयर रकबा का गौण वनोत्पाद, जलाशय, चारागाह, जैव विविधता इत्यादि प्रयोजन हेतु भूमि का अधिकार ग्राम सभाओं के माध्यम से वनवासी समुदाय को प्रदान किया गया है। इसके साथ ही वनवासियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण वन संसाधन के अधिकारों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने हेतु अब तक उपेक्षित प्रावधान को प्राथमिकता देने के फलस्वरूप जिले में समुदाय को ग्राम सभाओं के माध्यम से 283 सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार पहली बार प्रदान किये गये हैं। जिसके तहत मूल निवासियों को जल, जंगल एवं जमीन के संपूर्ण प्रबंधन उपयोग सहित संरक्षण एवं पुर्नजीवन हेतु संपूर्ण अधिकार पहली बार प्रदान किया गया है।

सरकार की मंशा व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों के प्रदाय

सरकार की मंशा व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों के प्रदाय के साथ ही इन हितग्राहियों के जीवन स्तर में बदलाव और आजीविका संवर्धन भी है। इस दिशा में वनाधिकार पट्टे प्राप्त हितग्राहियों में से 4646 हितग्राहियों के कृषि योग्य भूमि का भूमि समतलीकरण एवं मेड़ बंधान हेतु 22 करोड़ 90 लाख रूपए की स्वीकृति दी गयी और मनरेगा से कार्य कराया गया। जिसके सकारात्मक परिणाम इन हितग्राहियों ने उन्नत खेती-किसानी को अपनाया है।

वहीं 398 हितग्राहियों को डबरी निर्माण के लिए 6 करोड़ 17 लाख रूपए की सहायता दी गयी है। जिससे उक्त हितग्राही मछलीपालन करने सहित साग-सब्जी का उत्पादन कर आय संवृद्धि कर रहे हैं। इसके साथ ही 157 हितग्राहियों को पशुपालन करने हेतु गाय शेड निर्माण तथा फलदार पौधरोपण के लिए 2 करोड़ 56 लाख रूपए की सहायता दी गयी है। वहीं 3250 हितग्राहियों को ग्रामीण आवास तथा 9 हितग्राहियों को सोलर सिंचाई पंप स्थापना के लिए सहायता उपलब्ध करायी गयी है।

इन सभी सकारात्मक प्रयासों से वनाधिकार पट्टेधारी हितग्राहियों के परिवारों में खुशहाली है। वनाधिकार पट्टेधारी हितग्राही जैतालूर निवासी सीताराम मांझी एवं लालैया ककेम सहित कुयेनार निवासी धनाजी नेताम काबिज काश्त वन भूमि का वनाधिकार पट्टा देने के लिए राज्य सरकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहते हैं कि हमारे जैसे निर्धन लघु-सीमांत किसानों के लिए बहुत बड़ी मदद है, जिससे परिवार के सदस्यों के साथ खेती-किसानी को नई दिशा देने हेतु प्रोत्साहन मिला है।

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