छत्तीसगढ़

बीजापुर : प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. अम्बेडकर को दी श्रद्धांजलि

रायपुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के ग्राम जांगला (जिला-बीजापुर) में भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर उन्हें याद करते हुए उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा-आज 14 अप्रैल का दिन देश के सवा सौ करोड़ लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बाबा साहब की जन्म जयंती पर मुझे यहां आपके बीच आने का सौभाग्य मिला है। विकास की दौड़ में जो पीछे छूट गए थे या छोड़ दिए गए थे, उनमें आज विकास और अधिकारों की आकांक्षा जागी है। यह चेतना भी डॉ. अम्बेडकर की देन है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी का यह चैथा छत्तीसगढ़ प्रवास है। उन्होंने आज ग्राम जांगला की जनसभा में अपने विगत 21 फरवरी 2016 के छत्तीसगढ़ दौरे को याद करते हुए कहा कि उस यात्रा में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरूआत छत्तीसगढ़ की धरती से की गई थी। दोनों योजनाएं देश की प्रगति को गति दे रही हैं। मोदी ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा-बाब साहब बहुत पढ़े-लिखे विद्वान व्यक्ति थे। अगर वे चाहते तो दुनिया में कहीं भी ऐशो-आराम की जिंदगी बीता सकते थे, लेकिन उन्होंने विदेशी धरती पर पढ़ाई-लिखाई करने के बाद स्वदेश वापस आकर अपना पूरा जीवन वंचितों और दलितों के स्वाभिमान के लिए और उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए, उन्हें जीने के अधिकार दिलाने के लिए समर्पित कर दिया। मोदी ने कहा-एक गरीब का बेटा, पिछड़े तबके से आना वाला आपका ये साथी आज अगर प्रधानमंत्री के रूप में आपके सामने खड़ा है तो इसमें भी बाबा साहब का बड़ा योगदान है।

हल्बी बोली में की भाषण की शुरूआत

मोदी ने जनसभा में अपने उद्बोधन की शुरूआत बस्तर अंचल की प्रमुख सम्पर्क बोली ‘हल्बी’ में की। उन्होंने बस्तरवासियों की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी सहित भैरमगढ़ के भैरमदेव सहित अंचल के अन्य देवी-देवताओं को प्रणाम करते हुए हल्बी में कहा-सियान-सजन, दादा-दीदी मनचो जोहार, लेका-लेकी मनचो खूबे खूब मया। मोदी ने कहा-यहां के उन सभी देवी-देवताओं को मैं सादर नमन करता हूं, जिन्होंने बस्तरवासियों को प्रकृति के साथ रहना सिखाया है।

मोदी ने अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ आजादी की लड़ाई में अपने प्राण न्यौछावर कर देने वाले बस्तर अंचल के ही अमर शहीद गैंद सिंह और वीर गुंडाधूर को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा- ऐसे अनेक लोक नायकों की शौर्य गाथाएं इस अंचल में पीढ़ी-दर-पीढ़ी विस्तार पाती रही हैं और स्वाभिमान तथा पराक्रम की गाथाएं लिखी गई हैं। मोदी ने नक्सल हिंसा पीड़ित बस्तर संभाग में स्कूल-अस्पताल और सड़क निर्माण जैसे विकास के कार्यों में सुरक्षा प्रदान कर रहे अनेक पुलिस कर्मियों की शहादत का भी जिक्र किया।

जनता की सुविधा के लिए खनन कानून में बदलाव

उन्होंने कहा-देश की आजादी की लड़ाई में आदिवासियों का भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। केन्द्र सरकार ने पहली बार आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की संघर्ष गाथाओं की जानकारी आम जनता को देने के लिए संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा-जल, जंगल और जमीन आदिवासियों का अधिकार है। केन्द्र सरकार ने पुराने खनन कानूनों में बदलाव करते हुए यह भी प्रावधान किया है कि अब जिस इलाके में जो भी खनिज निकलेगा, उसका एक निश्चित हिस्सा खदान बहुल क्षेत्रों में विकास के कार्यों पर खर्च किया जाएगा। यह प्रावधान जनता की सुविधा के लिए किया गया है।

इसके लिए प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण कोष का गठन किया गया है। इस कोष से दी जाने वाली 60 प्रतिशत राशि पर्यावरण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण तथा शिक्षा जैसे कार्यों पर खर्च की जाएगी। छत्तीसगढ़ को इस कोष से अब तक तीन हजार करोड़ रूपए से ज्यादा राशि दी जा चुकी है।

मोदी ने कहा- केन्द्र सरकार ने देश के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया है। हमने निर्णय लिया है कि वर्ष 2022 तक देश में 50 प्रतिशत से ज्यादा आदिवासी आबादी वाले हर विकासखण्ड में या फिर ऐसे विकासखण्ड में जहां कम से कम बीस हजार की जनसंख्या आदिवासियों की होगी, वहां एकलव्य आवासीय विद्यालय खोले जाएंगे। प्रधानमंत्री ने आज ग्राम जांगला प्रवास के दौरान भारतीय स्टेट बैंक की नई शाखा का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा-आर्थिक असंतुलन को खत्म करने और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बैंक एक अच्छा माध्यम है।

केन्द्र सरकार द्वारा ऐसे इलाकों में बैंक शाखाओं के विस्तार के साथ-साथ अब देश के डाकघरों में भी बैंकिंग सेवाओं की शुरूआत की जा रही है। मोदी ने महिला सशक्तिकरण के लिए देश में हो रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ में इस दिशा में चल रहे प्रयासों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा- आज मुझे जांगला में छत्तीसगढ़ की बेटी सविता साहू के ई-रिक्शे में सवारी करने का सौभाग्य मिला। सविता ने कभी हार नहीं मानी और स्वावलंबन के लिए ई-रिक्शे को अपनाया। उज्ज्वला योजना के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक 18 लाख से ज्यादा महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। सुकन्या समृद्धि योजना और स्वच्छ भारत मिशन से भी महिला सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से सफलता मिल रही है।

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