छत्तीसगढ़

बिलासपुर : गवर्नमेंट स्कूल के दो बाल वैज्ञानिकों ने किया स्मार्ट बायो टॉयलेट का निर्माण!

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने ट्रेनों में बायो टॉयलेट का प्रयोग शुरू किया है। इसमें बड़ी खामी ये थी कि टॉयलेट का उपयोग करने के बाद लोग फ्लश नहीं करते थे।

हर्षवर्धन/बिलासपुर।
गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल के दो बाल वैज्ञानिक योगेश मानिकपुरी व मनीष यादव ने स्मार्ट बायो टॉयलेट का आविष्कार कर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की परेशानी को भी दूर कर दिया है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने ट्रेनों में बायो टॉयलेट का प्रयोग शुरू किया है। इसमें बड़ी खामी ये थी कि टॉयलेट का उपयोग करने के बाद लोग फ्लश नहीं करते थे।

इसके अलावा इसमें नेपकीन व प्लास्टिक का बॉटल डाल दिया जाता था। इसके चलते टायलेट चोक हो जा रहा था। बहुउपयोगी प्रयोग इसके चलते असफल साबित हो रहा था।

दोनों बाल वैज्ञानिकों ने स्मार्ट टॉयलेट के जरिए रेलवे की परेशानी को भी दूर कर दिया है। स्मार्ट बायो टॉयलेट को अत्याधुनिक रूप देते हुए इसमें सेंसर सिस्टम लगा दिया है।

सेंसर सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है। उपयोग के बाद सेंसर स्वचालित तरीके से काम करता है। ऑटोमेटिक फ्लश सिस्टम चालू हो जाता है।

भरपूर पानी निकलता है। बायो टॉयलेट को छह लेयर कंपार्टमेंट में अत्याधुनिक तरीके से बनाया गया है। प्लास्टिक का बोतल या फिर प्लास्टिक का अन्य कोई सामान जैसे ही टॉयलेट में डालेगा तो सेंसर सिस्टम के जरिए इसमें लगे कटर सक्रिय हो जाएंगे।

ऑटो सिस्टम से कटर चलने लगेगा और प्लास्टिक के बोतल व अन्य सामान को कटर के जरिए टुकड़ों में काट-काटकर बाहर निकाल देगा।

टॉयलेट में उपयोग किए जाने वाले पानी को आमतौर पर अनुपयोगी माना जाता है। बाल वैज्ञानिकों ने इस पानी का भी बखूबी उपयोग का तरीका इजाद कर लिया है।

स्मार्ट बायोटॉयलेट को बाल वैज्ञानिकों ने छह लेयर कंपार्टमेंट में तब्दील कर दिया है। एक लेयर में एजो बैक्टिरिया ट्री्रटमेंट किया गया है।

तीसरे लेयर में क्लोरिन टेबलेट रखा जाता है। जैसे ही फ्लश के जरिए पानी निकलता है दोनों की कंपार्टमेंट सेंसर के जरिए ऑटोमेटिक सक्रिय हो जाता है।

एजो बैक्टिरिया मल को 24 घंटे के भीतर पानी में तब्दील कर देता है। क्लोरिन टेबलेट के जरिए पानी को पूरी तरह परिष्कृत किया जाता है।

इस पानी का उपयोग कृषि कार्य में आसानी के साथ किया जा सकता है। फसल में सिंचाई के लिए इसे उपयोगी माना जा रहा है।

फसल के लिए इस पानी को बेहद उपयोगी माना जा रहा है। इसे खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। बाल वैज्ञानिकों ने इसका सफल प्रयोग भी किया है।

सामान्य पानी के बजाय इस पानी का सिंचाई में उपयोग करने पर पौधों का बाढ़ ज्यादा आता है साथ ही उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।

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