छत्तीसगढ़

बिलासपुर : शहर से लगे मोपका और लिंगियाडीह पटवारी हल्का में सरकारी जमीनों पर बेजाकब्जा की शिकायत के बाद कलेक्टर ने दिया जांच का आदेश

शिकायतकर्ता ने खसरा नम्बर 66, 67 और 159 पर बेजा कब्जा और निर्माण को लेकर जांच की मांग की है,बताया जा रहा है

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा
संवाददाता : मनीषा त्रिपाठी

जानकारी के मुताबिक मामले में शिकायतकर्ता ने खसरा नम्बर 66, 67 और 159 पर बेजा कब्जा और निर्माण को लेकर जांच की मांग की है,बताया जा रहा है कि तीनों जमीन सरकारी है,लेकिन रसूखदार जमीन माफियों ने तीनों शासन की नजर में बहुत महत्वपूर्ण है,इसमें सरकारी के साथ निजी जमीन भी है,जमीनों को पटवारी,आरआई से मिली भगत कर बेचा और बैठाया गया है।

अपोलो से लगी सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा,बलात प्लाटिंग और निर्माण के खिलाफ एक सामाजिक कार्यकर्ता ने शिकायत की है,शिकायत कर्ता ने कलेक्टर डॉ.मित्तर से लिखित आवेदन कर बताया है कि लिंगियाडीह पटवारी हल्का खसरा नम्बर 66 और 159 दोनों सरकारी जमीन है,दोनों ही जमीन पर कुछ रसूखदार सफेद पोश और जमीन माफियों ने कब्जा कर लिया है,जमीन पर अवैध तरीके से निर्माण कार्य भी किया गया है,सरकारी जमीन में दूसरी निजी जमीन को बैठाया गया है,इससे शासन को करोड़ों का राजस्व नुकसान हुआ है। इसमें पटवारी समेत आरआई और अन्य राजस्व अधिकारियों की जमीन माफियों से सांठगांठ है,खासकर खसरा नम्बर 66 काफी विवादास्पद है।

जिसके बाद शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कि कलेक्टर डॉ. मित्तर ने एसडीएम को जांच पड़ताल को लेकर जरूरी निर्देश दिया है।

जांच का दिया आदेश

मामले में एसडीएम देवेन्द्र पटेल ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर शिकायत आवेदन मिल चुका है,जल्द ही टीम का गठन कर तीनों खसरा की जांच के लिए टीम का गठन किया जाएगा,अतिरिक्त तहसीलदार तक कलेक्टर आदेश को भेज दिया गया है,जांच पड़ताल के बाद सारी बाते सामने आ जाएंगी,मामले की जानकारी शिकायतकर्ता को भी दी गयी।

पर देखने की बात यह होगी की अब तक प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर गलत कार्य को अंजाम देने वाले भू माफियाओं का साठ गांठ काम आता है या प्रशासन सही तौर पर इस पर जांच कर कार्यवाही करेगी,सूत्र बताते हैं कि पूर्व में गठित टीम में भी गड़बड़झाला था क्योंकि जानकारी के मुताबिक गठित की गई टीम को वहां के भू माफियाओं द्वारा बातचीत कर अपने पक्ष में रिपोर्ट बनवाई गई थी,जिसमें बताया जा रहा है कि लंबा गड़बड़झाला है,

वही सूत्रों की माने तो भू-माफियाओं द्वारा खसरा नम्बर 66 से लगी जमीन मालिको को फर्जी शिकायत कर फ़साने की कोशिश भी की गई,जिससे कि उन्हें आने जाने का रास्ता मिल सके और वह अपने मंसूबो पर कामयाब भी हो गए,वही अब देखने की बात होगी कि वर्तमान में गठित होने वाली टीम किस आधार पर बनेगी क्या वे भी भू माफियाओं से सांठगांठ कर इसे सही करार दे देंगे या सही तरीके से जांच कर प्रशासन सरकारी जमीनों का बंदरबाट करने वालो से बचाएगी,और इन भू माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही करेगी बहरहाल प्रशास।

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