छत्तीसगढ़

शैवाल से मिलेगा जैव ईधन, भविष्य में सस्ता और फायदेमंद

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बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग में चल रहे रिसर्च में प्रारंभिक तौर पर बड़ी कामयाबी मिली है।

शोध में पता चला है कि क्लोरेला समेत पांच प्रकार के शैवाल में जैव ईंधन बनाने के तत्व मौजूद हैं। प्रदूषण रहित और प्रकृति में भरपूर मात्रा में मिलने के कारण यह भविष्य में सबसे सर्वश्रेष्ठ ईंधन साबित हो सकता है।

वनस्पति विभाग के जैव संसाधन प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में डॉ.एसके शाही के निर्देशन में यह शोध पिछले तीन साल से चल रहा था। अब जाकर सफलता मिली है। रिसर्च स्कॉलर रवि कुमार यादव ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

शैवाल में पाए जाने वाले महत्त्वपूर्ण लिपिड्स के गुणों का अध्ययन किया है। प्रदेश में पाए जाने वाले क्लोरेला, सेनडेस्मस,कोस्मेरियम, बोट्रियोकोकसए स्पाइरुलिना, नोस्टोक पांच ऐसे शैवाल हैं जिनमें ईंधन बनाने के तत्व मौजूद हैं।

इन्हें एकत्रित करके प्रयोगशाला में संवर्धित कर इनके बायोमास को बढ़ाने पर कार्य किया गया। इसके बाद इनसे वसीय अम्लों को पृथक कर इनकी जांच की गई जिससे यह पता चला कि इन शैवालों में जैव ईंधन के लिए महत्वपूर्ण संतृप्त एवं असंतृप्त वसीय अम्ल ;म्युफाद्ध अत्यधिक मात्रा में पाए जाते है।

इन शैवालों का प्रयोग औद्योगिक स्तर पर जैव ईंधन के निर्माण के लिए किया जा सकेगा जिससे आने वाले समय में लोगों के लिए रोजगार की संभावनाए पैदा की जा सकती हैं।

इको फ्रेंडली भी

डॉ.शाही का कहना है कि शैवाल से जैव ईंधन बनाने की प्रारंभिक चरण में सफलता मिली है। अन्य फ्यूल के मुकाबले यह बेहद लाभदायक होगा। प्रदूषण रहित और कभी खत्म नहीं होने वाला। शैवाल को जितना पुर्नउत्पादित करेंगे उतना ही सस्ता होगा।

फोर्थ जनरेशन की डिमांड यही होगी। आलू से भी इथनाल बना सकते है,लेकिन फूड पर असर पडेगा,समस्या होगी। जबकि शैवाल के साथ यही स्थिति नहीं होगी।

प्रोडक्शन बढ़ाने से लाभ

शैवाल उत्पादित करने के लिए जितना अधिक प्रोडक्शन बढ़ाऐंगे उतना फायदा होगा। रोजगार के साथ इसे तैयार करना भी आसान है। प्राकृति,पानी और सूर्य की रोशनी पर निर्भर है। जगह भी अन्य के मुकाबले कम लेता है। जितनी बड़ी दूसरे फैक्टरी होते है उतने में कई गुना इसे बढ़ा सकते हैं। पर्यावरण को भी फायदा होगा।

छत्तीसगढ़ में ये है चयन की प्रक्रिया

रिसर्च के दूसरे चरण में छत्तीसगढ़ के पर्यावरण को इसके लिए सबसे अनुकूल माना जा रहा है। भविष्य में कई और शैवाल के पता चलने का दावा किया जा रहा है। जिससे उर्जा पर और अधिक फोकस किया जा सके।

शैवाल एक प्रकार के जलीय पादप होते हैं जो तालाबों, नदी, झील एवं जल के विभिन्न स्त्रोतों में आसानी से मिल जाता है।
रिसर्च में पता चला है कि पांच प्रकार के शैवाल में जैव ईंधन बनाने के तत्व हैं।

इससे भविष्य में काफी फायदा होगा। मोटर गाड़ियां, जहाज इससे चल सकेंगे। यह पेट्रोल, डीजल व रतनजोत, सोयाबीन, मक्का जैसे जैव इंधन से कहीं बेहतर होगा। सस्ता और खत्म न होने वाला ईंधन होगा। बस्तर व रायगढ़ के जंगलों में शैवाल के और प्रकार खोज रहे हैं।

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शैवाल से मिलेगा जैव ईधन, भविष्य में सस्ता और फायदेमंद
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