Birthday Spl : लता मंगेशकर ने इस गीतकार को यूं सिखाया था सबक

लता मंगेशकर ने हिन्दी और मराठी सहित देश की लगभग 20 भाषाओं के संगीत में अमूल्य योगदान दिया है।

आज 28 सितम्बर को लता मंगेशकर का जन्मदिन है। लता मंगेशकर 89 साल की हो गई हैं। बेहद मीठी आवाज में गाने वाली लता मंगेश्कर का जन्म इंदौर में हुआ था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर मशहूर संगीतकार थे। सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने बेहद छोटी उम्र में गायन में महारत हासिल की और विभिन्न भाषाओं में गीत गाए। लता मंगेशकर ने करीब 7 दशक तक हिंदी गानों की दुनिया पर राज किया है। उन्होंने 30 हजार से ज्यादा गानें गाए हैं। लता मंगेशकर तीन बहनों मीना मंगेशकर, आशा भोसले, उषा मंगेशकर और एक भाई ह्रदयनाथ मंगेशकर में सबसे बड़ी थीं।

वैसे तो सुरों की बेताज बादशाह लता मंगेशकर के बारे में कई ऐसी बातें है जो काफी दिलचस्प हैं। लेकिन एक किस्सा उस वक्त का भी है जब लता मंगेशकर एक गीतकार पर भड़क गई थीं। इस किस्से का जिक्र है किताब इन सर्च ऑफ लता मंगेशकर में। इस किताब को लिखा है हरीश भीमाणी ने। हरीश भीमाणी ने 21 देशों के 53 अलग-अलग शहरों में लता मंगेशकर के सैकड़ों कार्यक्रम का संचालन किया था। बाद में हरीश भीमाणी ने अपने अनुभवों के आधार पर डायरी लिखी और यहीं डायरी बाद में एक किताब के तौर पर छपी।

इस किताब में हरीश भीमाणी लिखते हैं कि लता मंगेशकर ने बताया कि अगर मेरी किसी चीज की कोई बहुत तारीफ कर देता था तो मैं वो चीज उसे दे देती थी। उन दिनों फिल्म महल बन रही थी। फिल्म के एक गाने के लिए हुई बैठक में गीतकार नक्शाब ने लता की कलम की बहुत तारीफ की। इसके बाद लीजिए इसे आप रखिए ये कहते हुए लता ने ये कलम उन्हें थमा दी। लेकिन लता भूल गईं कि उस कलम पर उनका नाम खुदा हुआ था। इसके बाद नक्शाब ने लता के नाम वाली कलम फिल्म इंडस्ट्री में सबको दिखानी शुरू कर दी कि उन दोनों के बीच कुछ चल रहा है। लता ने इस मामले में चुप रहना ही ठीक समझा क्योंकि वे जानती थीं कि अगर वे उन्हें झूठा साबित करने की कोशिश करेंगी तो बवाल और बढ़ेगा।

एक और रिकॉर्डिंग में नक्शाब और लता एक बार फिर आमने-सामने थे। नक्शाब यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि लता उनके प्यार में पड़ गई हैं। इसलिए रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद वो बीच-बीच में उनके बूथ में घुस जाते थे और उनसे कहते थे कि इन लाइनों में इतनी मुहब्बत भर दो कि ऐसा लगे कि तुम अपने प्रेमी के सामने बिना शर्त समर्पण कर रही हो। लता ने यहां भी अपना गुस्सा पी लिया। लेकिन एक दिन लता अपने नाना चौक वाले घर के अहाते में बहनों के साथ खेल रही थीं। तब ही यह गीतकार अचानक उनके घर पहुंच गए।

लता ने बताया, अगर मैं अकेली होती तो उनके आने से दिक्कत में पड़ सकती थी, लेकिन अपनी बहनों के सामने मैं उस चिपकू आदमी से एक शब्द भी नहीं सुनना चाहती थी ;मैं उन्हें सड़क पर ले गई गुस्से में साड़ी का पल्लू कमर में खोंसते हुए मैंने पूछा कि मेरी इजाजत के बिना मेरे घर आने की उनकी हिम्मत कैसे हुई? मैंने उन्हें धमकाया, अगर मैंने दोबारा तुम्हें यहां देखा तो तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर इस गटर में फेंक दूंगी ये मत भूलना कि मैं मराठा हूं।

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