दो टूक (श्याम वेताल) : भाजपा कमांडर बदले तभी जीत सकेगी लोकसभा चुनाव

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श्याम वेताल

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मुंह की खानी पड़ी है. राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य भाजपा के हाथों से जाते रहे. इन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की एक न चली.

आश्चर्य तो इस बात का है कि इन तीनों राज्यों में छत्तीसगढ़ी अकेला प्रदेश रहा जहां यह कहा जा रहा था कि भाजपा वापस आएगी और बहुमत नहीं हासिल कर पाए तो वह दो चार सीटें से ही पीछे रहेगी. लेकिन चुनाव परिणामों ने तो सबको हैरान कर दिया. वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में 90 में से 49 सीटें पाने वाली भाजपा मात्र 15 सीटों पर सिमट गई. ऐसी शर्मनाक हार की कल्पना तो 68 सीट जीतने वाली कांग्रेस पार्टी ने भी नहीं की होगी.

ऐसा नहीं है कि भाजपा के नेताओं ने छत्तीसगढ़ को उपेक्षित कर दिया था. नरेंद्र मोदी, अमित शाह ने चुनाव के दौरान कई बार राज्य का दौरा किया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के बाद सबसे ज्यादा 19 जनसभाओं को छत्तीसगढ़ में संबोधित किया और उनकी रैलियों में भीड़ भी अच्छी खासी देखी गई थी लेकिन वह भीड़ वोट में तब्दील नहीं हो सकी.

खैर, चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के हाशिए पर आने का कारण नरेंद्र मोदी, अमित शाह की जुगल जोड़ी से आजिज आ जाने से ज्यादा डॉ रमन सिंह को अपने इशारों पर नचाने वाले नौकरशाही रही. जबकि राजस्थान और मध्यप्रदेश में हार की वजह के पीछे नरेंद्र मोदी, अमित शाह के साथ वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के विरुद्ध जनाक्रोश रहा.

अब तो यह सवाल उठने लगा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में क्या पार्टी के नेता का चेहरा बदलना चाहिए? साथ ही पार्टी अध्यक्ष भी बदला जाय तो शायद नुकसान कम होगा. नरेंद्र मोदी और अमित शाह के रहते नुकसान जरूर होगा. नरेंद्र मोदी और अमित शाह के रहते नुकसान जरूर होगा और कोई आश्चर्य नहीं है कि पार्टी गठबंधन NDA सरकार बनाने लायक सीटें भी हासिल न कर पाए.

पार्टी के कई बड़े नेता भी शायद ऐसा ही महसूस कर रहे हैं. विदर्भ के किसान नेता अनिल किशोर झा का कहना है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यदि लोकसभा चुनाव लड़ा गया तो सफलता नहीं मिलेगी. वर्ष 1997 में भाजपा से अलग हो गए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनिल किशोर ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में स्पष्ट कहा है कि उनका भाजपा के कई बड़े नेताओं ने बताया है कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में भी कई सदस्य अपने को अपमानित महसूस करते हैं.

इतना ही नहीं अनिल किशोर कहते हैं कि विधानसभा चुनाव में हुई पार्टी की पराजय की जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी को लेनी चाहिए. अनिल किशोर ने इन्हीं विचारों को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को एक पत्र भी लिखा है. इस पत्र में उन्होंने संघ को अपने विचारों से अवगत कराते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी की जगह यदि नितिन गडकरी को कमान सौंपी जाती है तो लोकसभा चुनाव में पार्टी विजय हासिल कर सकती है. देखा जाए तो अनिल किशोर की बात में दम है. नरेंद्र मोदी का जादू अब उतर चुका है प्रधानमंत्री के रूप में उनका अहंकार भाव प्रबल हो गया है. जो लोगों के गले नहीं उतर रहा है.

उनके भाषणों में “मैं” और “हम” की प्रधानता और कांग्रेस को नीचा दिखाना अब लोगों के लिए असहज हो रहा है. लोकसभा चुनाव तक यदि ऐसा चलता रहा तो उनके प्रति जन आक्रोश बढ़ने की पूरी पूरी संभावना है. एक बात और इस बार भाजपा यदि यह सोचती है कि उसका सांप्रदायिक कार्ड या राम मंदिर मुद्दा उन्हें लोकसभा में भारी बहुमत दिलाने में सफल होगा तो वह गलत सोच रही है. सांप्रदायिक कार्ड तो बिल्कुल नहीं चलेगा और राम मंदिर मुद्दे पर भी अब आम वोटर उत्साहित नहीं दिखता है. नए वोटरों या युवा पीढ़ी को न हिंदूवाद से कोई लेना देना है और ना राम मंदिर से. उनकी इन दोनों ही मुद्दों में कोई रुचि नहीं है.

सभी को मालूम है कि युवा वोटर की संख्या इस समय सबसे ज्यादा है और वह सियासत और उसके मुद्दों को समझता है. उसे अपने लाभ के मुद्दे मसलन विकास, रोजगार के अवसर, अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य आकर्षित करते हैं. अत: भाजपा को अपना परंपरागत स्वरूप बदलना होगा और इसे बदलने के लिए सोच में परिवर्तन करना होगा. इस परिवर्तन के लिए जरूरी है कि नेतृत्व की बागडोर किसी नए को सौंपी जाए. जो युवा मन की गहराई उसकी दिशा और उसका मंतव्य समझता हो. सीधी बात है कि लोकसभा चुनाव जीतना है तो भाजपा को कमांडर बदलना ही होगा.

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