लोग पीलिया से मर रहे भाजपा सरकार कुम्भकर्णी निद्रा में – कांग्रेस

राज्य सरकार अपने दायित्वों को निभाने में असफल

रायपुर: राजधानी में पीलिया से दो और मौतें होने पर कांग्रेस ने गहरी चिंता व्यक्त की है. कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा सरकार के नाक के नीचे राजधानी में पीलिया जैसी बीमारी से पांच लोगों की जान चली गयी सैकड़ो लोग इस बीमारी की चपेट में है, सरकार और नगरी निकाय विभाग कुम्भकर्णी नीद में सोया हुआ है.

त्रिवेदी ने कहा मंत्री, मुख्यमंन्त्री को राजनैतिक कार्यक्रमो से फुर्सत ही नही है कि वह प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगो को राहत पहुचाने की कवायद करे. महापौर को भाजपा सरकार फ्रीहैंड से काम नही करने दे रही है. नगरीय निकायों के अधिकारों पर नौकरशाही का अतिक्रमण हो चुका है. निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को जनहित के काम करने से रोक रहे है, बल्कि राजनैतिक कारणों से सरकारी अफसर जनहित के कार्यो में बाधा भी डालते है. निगम कमिश्नर सरकार के इशारे पर दुकानों के साइन बोर्ड से वसूली करने और दिवालो पर चित्रकारी करने में व्यस्त है. नगर निगम का मूलभूत काम, नाली, सफाई और शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाना है. दुर्भाग्य है कि निगम को यही काम नहीं करने दिया जा रही है.

रायपुर को तथाकथित रूप से स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करने वाली भाजपा सरकार बताये की क्या सिर्फ नारो और दिवालो पर चित्रकारी करने मात्र से ही रायपुर स्मार्ट सिटी बन जाएगी? जहां पर सरकार अपने नागरिकों को पीने का साफ पानी नही उपलब्ध करवा पा रही उस शहर को स्मार्ट सिटी के दावे सिर्फ खोखले और काग है. रायपुर से सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर दो-दो वरिष्ठ मंत्री है. दुर्भाग्यजनक है कि दोनों मंत्रियों को शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी का थोड़ा भी अहसास नही है और न ही इन मंत्रियों में उस शहर के लोगो के लिए संवेदना बची है,

जिस शहर के लोगो ने अपने प्रतिनधि के तौर पर इतना बड़ा ओहदा और राजनैतिक रसूख दिया है. रायपुर में होने वाले हर छोटे बड़े निर्माण के शिलान्यास से लोकार्पण तक मे श्रेय लेने की गलाकाट प्रतिस्पर्धा में लगे भाजपा के सांसद, मंत्री, विधायक, राजधानी में भयावह रूप ले चुकी पीलिया बीमारी के फैलने में अपनी जबाबदेही से बच नही सकते. जिस शहर में पूरी सरकार बसती है वहा की यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य शहरों के हालात इससे भी बदतर है.

कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि पीलिया को आपदा घोषित कर इसके नियंत्रण और बचाव के हर सम्भव उपाय प्राथमिकता के आधार पर किये जाय. भाजपा सरकार की प्रशासनिक लापरवाही और अकर्मण्यता का आलम यह है कि उच्चन्यायालय ने पीलिया और दूषित पानी के मामले में संज्ञान ले कर टिप्पणी किया निर्देश जारी किया लेकिन सरकार में बैठे हुए लोगो को कोई फर्क नही पड़ा. न कोई बड़ी कार्यवाही हुई और न ही प्रभावी उपाय. 40 किमी पाइप लाइन बदलने के प्रस्ताव की फाइल एक पखवाड़े से मंत्रालय में धूल खा रही है और किसी को कोई चिंता ही नही है. रायपुर में और प्रदेश में पीलिया और अन्य जलजन्य वाटरबार्न बीमारियों का प्रकोप अब नियम बन चुका है और स्मार्ट सिटी के नशे में मदहोश भाजपा की सरकारें स्मार्टनेस दिखाने की बात तो दूर रही जनहित के कार्यो को रोकने में ही व्यस्त है.

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